पडरौना (कुशीनगर)। गंडक नदी पिछले वर्ष से अपना रास्ता बदल रही है। नदी इस वक्त दक्षिण किनारे पर बंधे से सटकर बह रही है। नदी के जलस्तर में मामूली वृद्घि होते ही बांधों पर दबाव बढ़ने लगा है। अमवा तटबंध के बरवापट्टी और एपी तटबंध के पिपराघाट से लेकर नरवाजोत तक नदी का दबाव है। बाढ़ बचाव कार्य के लिए अब तक बजट ही नहीं मिला है। लिहाजा इस बरसात में जलस्तर बढ़ते ही नदी कुशीनगर जिले में तबाही मचा सकती है।
हिमालय से निकली गंडक नदी बरसात में बेहद खतरनाक हो जाती है। वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छूटते ही कुशीनगर जिले के खड्डा व तमकुहीराज तहसील के एक दर्जन से अधिक गांव सीधे बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। पिछले वर्ष से ही नदी उत्तर किनारे को छोड़कर दक्षिण किनारे पर आ गई है। इस वक्त छितौनी, अमवा और पिपराघाट में नदी बांध के एकदम समीप है। बिहार के पिपरा-पिपरासी तटबंध के किनारे भी यही हालात है। बिहार के इस बांध से यूपी सीमा के गांवों की सुरक्षा होती है। बिहार के ठकरहा प्रखंड के सामने पिपरा-पिपरासी तटबंध के ठोकर नंबर एक पर नदी सीधे दबाव बना रही है। यही हालत अमवा तटबंध का भी है। नदी बरवापट्टी के सामने महीने भर से कटान कर रही है।
परियोजनाओं को नहीं मिला धन
बाढ़ खंड डिवीजन के एक्सईएन भरत राम की मानें तो इस वर्ष 46 परियोजनाएं बनाकर शासन को भेजी गई थीं। पौने तीन अरब की इन परियोजनाओं से छितौनी, अमवा तटबंध और अहिरौलीदान-पिपराघाट (एपी) तटबंध पर कार्य होना था। मगर अब तक इन परियोजनाओं के लिए बजट नहीं मिल सका है। तमकुहीराज के विधायक अजय कुमार लल्लू का कहना है कि वे स्वयं इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री व बाढ़ प्रबंधन मंत्री से मिले थे। दोनों ने समय से बजट के साथ ही बाढ़ बचाव कार्य कराने का भी आश्वासन दिया था लेकिन धन की कमी के चलते बरसात में तबाही रोकना मुश्किल होगा।
जरूरी उपाय हो रहे हैं : डीएम
डीएम डॉक्टर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ बचाव के लिए हर संभव जरूरी उपाय किए गए हैं। जहां बजट की जरूरत है वहां के लिए डिमांड भी भेजी गई है। बीते 14 जून को खड्डा व तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों में एनडीआरएफ टीम की मदद से बचाव कार्य का पूर्वाभ्यास कराया गया था। सभी विभागों को बाढ़ से बचाव व बाद में लोगों की मदद के लिए जरूरी सामान तैयार रखने का निर्देश दिया जा चुका है।