कुशीनगर। तमाम उपायों के बावजूद गंडक नदी की कटान की गति कम नहीं हो रही है। शनिवार को बाघा चौर गांव के नोनियापट्टी टोले का एक पक्का मकान कटकर नदी में विलीन हो गया। अहिरौलीदान के कचहरी टोला व डीह टोला के सामने भी कटान हो रहा है।
गंडक नदी अहिरौलीदान गांव के सामने करीब 20 दिन से कटान कर रही है। इस गांव के दो टोले के लोग अपना सामान समेटकर पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा डीह टोला व कचहरी टोला के लोग भी मकान तोड़ रहे हैं। तीन दिन से नदी बाघाचौर गांव के नोनियापट्टी के सामने भी तेजी से कटान कर रही है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड डिवीजन की तरफ से किए जा रहे सभी उपाय अब तक विफल रहे हैं।
शनिवार को नोनियापट्टी गांव निवासी योगेंद्र बैठा का मकान गंडक नदी की कटान से ढह गया। मकान का अधिकांश हिस्सा नदी में बह गया है। इस परिवार के लोग पहले ही मकान खाली कर चुके थे। योगेंद्र के मकान के नजदीक ही शिवराज सिंह, रामचंद्र गोंड, शिवरतन, पहवारी, विरेंद्र, रगड़राम, सुरेंद्र आदि के भवन हैं, जिन पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। भयभीत लोग सामान निकाल चुके हैं। अब मकान को तोड़कर मलबा हटाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि बाढ़ खंड डिवीजन ने एक पखवाड़ा पहले ही बचाव कार्य शुरू किया होता तो इतनी तबाही नहीं मचती।
इस संबंध में बाढ़ खंड डिवीजन के अधिशासी अभियंता बीपी सिंह का कहना है कि बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। सभी संवेदनशील जगहों पर नजर रखी जा रही है। परंतु कटान की गति इतनी तेज है कि इस रोक पाने में सफलता नहीं मिल पा रही है। लोग यहां से पहले ही सुरक्षित स्थान पर जा चुके हैं।