पडरौना। अवैध अस्पतालों व क्लीनिक में मरीज पहुंचाने में 90 आशा कार्यकर्ताओं को सीएमओ कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इसमें 18 ऐसी आशा कार्यकर्ताओं को चिह्नित किया गया है जो सरकारी अस्पतालों से गर्भवतियों को निजी अस्पतालों में पहुंचाती हैं।
कुबेरस्थान सीएचसी गेट पर आशा कार्यकर्ता अवैध तरीके से क्लीनिक चला रही थी। दस बार नोटिस देने के बावजूद क्लीनिक बंद नहीं हुई तो उसेे सील कर दिया गया। 18 आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पूर्व में हुई जांच में उनकी संलिप्तता मिल चुकी है।
कमीशन के लालच में गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों से बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल या खुद से संचालित क्लीनिक पर लेकर चली जाती हैं। कई बार प्रसव व ऑपरेशन के दौरान प्रसूता को जान तक गंवानी पड़ जाती है। जिले में 3549 आशा कार्यकर्ता हैं, जिनकी जिम्मेदारी गर्भवती महिलाओं की निगरानी और सुरक्षित प्रसव के लिए नजदीकी सीएचसी व मेडिकल कॉलेज पहुंचाना है, लेकिन दलालों से मिलकर प्रसूताओं को बेहतर इलाज का झांसा देकर अवैध अस्पतालों या निजी अस्पतालों में पहुंचा देती हैं। आर्थिक शोषण के साथ-साथ यह लापरवाही प्रसूताओं की जान पर बन आती है।
मई में दायित्वों के प्रति लापरवाह 90 आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया। इनमें 72 आशा कार्यकर्ता काम पर लौट आई हैं, लेकिन 18 ने कोई जवाब नहीं दिया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पता चला है कि 18 आशा कार्यकर्ता या तो चोरी से क्लीनिक चला रही हैं या निजी अस्पतालों के लिए काम कर रही है। दो दिन पहले कुबेरस्थान सीएचसी गेट पर आशा कार्यकर्ता साबरा खातून अपने मकान में निजी क्लीनिक चलाती पाई गई थी।