हाटा (कुशीनगर)। नए पेराई सत्र में किसानों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही है। मिल गेट पर गन्ना की वाहनों से गन्ना लेकर पहुंचे किसान जाम में फंस रहे है और फिर समय सीमा समाप्त होने की वजह से उनकी पर्ची एक्सपायर हो जा रही है, जिसकी वजह से उनके गन्ने की तौल नहीं हो रही है। मजबूरी में किसान क्रेसर पर गन्ना बेचने को विवश हो रहे है। वहीं दूसरी ओर इस दिक्कत को लेकर मिल कर्मी और किसानों के बीच रोज नोकझोंक भी हो रही है।
हाटा क्षेत्र की न्यू इंडिया शुगर मिल ने 20 नवंबर से पेराई शुरू किया है। नए पेराई सत्र में गन्ना सप्लाई पर्ची काटने और वितरण का कार्य केन यूनियन की देख रेख में प्राईवेट फर्म के जिम्मे है। इस व्यवस्था से किसानों की दुश्वारियां बढ़ गई है। पर्ची जारी के बाद तौल के लिए चार दिनों का समय दिया जा रहा है। किसान अपना गन्ना तैयार कर जब मिल गेट पर पहुंच रहा है तो जाम के कारण गेट से यार्ड तक पहुंचने में 24 से 48 घंटे का समय लग जा रहा है। परेशानी तब हो रही है जब इसी लाईन में लगे-लगे उनकी सप्लाई पर्ची एक्सपायर हो जा रही है, जिसकी वजह से मिल की ओर से उनका गन्ना तौल करने से मना कर दिया जा रहा है। मंगलवार को मिल के यार्ड में अपना गन्ना लेकर पहुंचे सत्यप्रकाश राव ने बताया कि 22 नवंबर को उनकी पर्ची जारी की गई थी। जिस पर 26 नवंबर तक गन्ने की तौल कराने की समय सीमा दर्ज थी। 25 नवंबर को वह दो ट्रक गन्ना लेकर ढाढा चीनी मिल पर पहुंच गए। गन्ना लदी गाडियों की लंबी लाईन के कारण मंगलवार की सुबह उनका गन्ना मिल के सी यार्ड में पहुंचा तो मिल कर्मचारियों ने पर्ची का डेट एक्सपायर होने का हवाला देते हुए गन्ना वापस ले जाने को कहा दिया। जिस पर वहां मौजूद अन्य किसान तौल कराने पर अड़ गए। वहा मौजूद कसया के रहने वाले किसान महंगु, उपेद्र, पिडरा के शैलेंद्र, पडरी के रामा आदि बताया कि पहले पर्ची हायल हो जाने पर मिल गेट पर ही उसे बना दिया जाता था। जबकि इस बार किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। इन किसानों ने चेतावनी दी कि अगर उनका गन्ना तौला नहीं गया तो वह लोग यार्ड में ही गन्ने को जला देंगे।वहीं भड़गवा गांव के नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह गन्ना लेकर मिल में गए थे। यार्ड में पहुंचने से पहले ही सप्लाई पर्ची एक्सपायर हो गई। जिसके बाद उन्हें गन्ना लदी गाड़ी घुमा कर अपना गन्ना सुकरौली के एक क्रेसर पर काफी कम दामों में बेंचना पड़ा।
मदरहा के रहने वाले नरेंद्र सिंह ने बताया कि पर्ची जारी होने के बाद गन्ना तैयार कराने में कई दिन लग जा रहा है। उपर से मिल गेट पर जाम की समस्या शुरू से ही बन गई है। मिल पर पहुंचने के बाद भी पहली बार भी पहली बार क्रेसर पर गन्ना बेचना पड़। महादनपुर के रहने वाले नन्हें पांडेय के बताया कि पहले की व्यवस्था में पर्ची हायल होने पर गेट पर ही बन जाती थी, लेकिन अब तो कोई सुनने वाला ही नहीं है। मिल से सुकरौली क्रेसर पर ले जाकर गन्ना बेचना पड़ा है वह भी उधार में।पकड़ी गांव के शेषमन सिंह ने बताया कि इन व्यवस्था से किसानों को शोषण हो रहा है। मिल पर गन्ना देने के लिए गए किसानों को क्रेसर पर गन्ना बेच कर आना पड़ रहा है। अब तो गन्ना बोना ही गुनाह हो गया है।