तमकुहीरोड। बड़ी गंडक के बढ़ते जलस्तर और इसके किनारे के गांवों में पानी आ जाने के बाद अब नाविकों को अपनी बेकार पड़ी नावों की फिक्र होने लगी है। क्योंकि बाढ़ के दौरान इन्हीं नावों को सरकारी नाव के रूप में इस्तेमाल कर न केवल हजारों की कमाई करेंगे, बल्कि बाढ़ बचाव कार्य में अहम भूमिका भी निभाएंगे। नाविकों ने अपनी पुरानी और जर्जर हो चुकी नावों की मरम्मत कराना शुरू कर दिया है।
हर साल बाढ़ आने पर बड़ी गंडक के किनारे बसे गांवों में नाविकों की जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे समय में बाढ़ प्रभावित लोगों के फंसे होने पर बचाने और आवागमन को बहाल रखने के उद्देश्य से तहसील प्रशासन की ओर से नाव और नाविकों की ड्यूटी लगाई जाती है। जिन लोगों के पास नाव है, उसका रखरखाव ठीक से नहीं होता है और इस तरह की नावों को लोग नदी के किनारे बांधकर छोड़ देते हैं।
इन दिनों पिपराघाट ऐहतमाली, राजपुर खास, पिपराघाट मुस्तकील आदि राजस्व गांवों के कई टोलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं इमिलिया टोला, मुसहर टोला, देवनारायन टोला, उपाध्याय टोला, नरवाटोला, जयपुर, हनुमान टोला सहित कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे सड़कों पर पानी भर गया है तो नाविकों को अपने पुराने और जर्जर नावों को ठीक कराने की सुधि लौट आई है। पिपराघाट, गोलाघाट, जंगलीपट्टी, बिनटोली, जवहीदयाल के मल्लाहों ने अपने पुराने और जर्जर नावों की मरम्मत कराने कार्य तेज कर दिया है। क्षेत्र के ध्रुव निषाद, भागवत निषाद, जेपी निषाद, परमा निषाद, विश्वनाथ चौधरी, शिवपूजन निषाद आदि का कहना है कि बाढ़ के दौरान वह शासन की मदद तो करते हैं, लेकिन कई लोगों का पिछले साल का बकाया अभी तक नहीं मिला है।