कुशीनगर। गंडक नदी अहिरौलीदान गांव के खैरफुटा टोले के पास लगातार कटान कर रही है। बाढ़ खंड विभाग की तरफ से अब तक किसी तरह का बचाव कार्य शुरू नहीं कराए जाने से निराश लोगों ने अब अपने पक्के मकानों को भी तोड़ना शुरू कर दिया है। ताकि कटान से होने वाले क्षति को कम किया जा सके। दो लोगों की झोपड़ियां पहले ही कटान की चपेट में आकर नदी में विलीन हो चुकी हैं। इसके बाद से ही गांव के लोग दहशत में हैं।
बीते एक सप्ताह से अहिरौलीदान गांव के सामने गंडक नदी तेजी से कटान कर रही है। नदी खैरफुटा टोला के अलावा मदुरही, नोनियापट्टी व कचहरी टोला के लिए भी खतरा बन गई है। कटान के चलते कई एकड़ खेत फसल समेत कट ही चुके हैं और अब मकान भी कटान की चपेट में आने लगे हैं। खैरफुटा टोला निवासी विनोद चौहान व महेश चौहान की झोपडियां कटान की भेंट चढ़ चुकी हैं। बुधवार को बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता समेत अन्य अभियंताओं ने कटान प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया लेकिन बचाव कार्य से हाथ खड़ा कर दिया। अधिकारियों का कहना था कि जब तक वरिष्ठ अफसरों का निर्देश नहीं मिलेगा, तब तक कोई कार्य नहीं हो सकता है।
उधर, कटान से भय से गनेश चौहान और उमेश चौहान ने बृहस्पतिवार को अपना पक्का मकान तोड़ना शुरू कर दिया। इनके अलावा बाबूलाल, जगदीश, चंद्रेश्वर, मैनेजर, बलिस्टर, गाम्हा, नान्हू आदि ने भी सामान समेटने के साथ ही अपनी झोपड़ियां उजाड़ने लगे हैं। लोगों का कहना है कि बाढ़ खंड व प्रशासन की तरफ से कटान रोकने के लिए उपाय नहीं किए जाने की वजह से अब खैरफुटा टोले के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसलिए समय रहते यहां से सामान समेटकर कहीं और बस जाना ही बेहतर है। इस गांव का बैरिया टोला, चित्तू टोला और कंचन टोला पहले ही नदी की धारा में कट चुका है। गांव निवासी जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, पूर्व प्रधान मजिस्टर पासवान, जेके सिंह, अरविंद सिंह, सुजीत यादव, रामविलास शर्मा, रामपूजन पासवान आदि ने कटान रोकने का उपाय शुरू कराने की मांग की है।