फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंडी व सरकारी निगरानी तंत्र नहीं होने केला किसान बिचौलियो से लूटने को विवश

विज्ञापन
विज्ञापन
केले की खेती तरफ बढ़ रही रुझान
विज्ञापन

सुविधाएं मिले तो किसानों की किस्मत बदल सकती है
मंडी, ट्रांसपोर्ट और सरकारी मदद की है किसानों को दरकार
विद्याधर तिवारी
खड्डा। बंद होती जा रही चीनी मिलें और बकाया मिलने में परेशानी होने से क्षेत्र के किसान गन्ने की जगह केले की खेती को तरजीह देने लगे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर से सुविधाएं मुहैया कराए जाने से किसानों की परेशानी कम नहीं हो रही है। स्थायी मंडी व केला प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट, प्राकृतिक आपदा में फसल को होने वाली क्षति की भरपाई नहीं हो पाती है। देश के पश्चिमी हिस्से और नेपाल में केले की सप्लाई होने के बावजूद किसानों की दशा सुधर नहीं रही है।
विज्ञापन

क्षेेत्र के किसान मुन्ना और नरेंद्र बताते हैं कि 12 से 14 महीने में केले की फसल तैयार होती है। गंवई स्तर पर उपलब्ध जानकारी के जरिए केले की खेती की जाती है। तमाम छोटे किसान रकम के अभाव में खाद दुकानदार से उधारी पर लाकर काम चलाते हैं। खरपतवार व दवा छिड़काव, हर दस से 15 दिन में सिंचाई करनी होती है। केले का तना टूट न जाए, इसके लिए रस्सी से बांधना, खेत की कोड़ाई, जुताई, जानवरों से बचाव, फसल चोरों से सुरक्षा करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। प्राकृतिक आपदा की दशा में फसल बर्बाद होना तय है। केले की खेती करने वाले किसान नागेंद्र सिंह बताते हैं सरकारी मंडी नहीं होने व निगरानी प्रणाली के अभाव में किसान आसपास के बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं। मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, हरियाणा आदि के लोग अपने को बड़ा व्यापारी बताकर आते हैं और क्षेत्रीय कुछ लोगों को एजेंट बना कर केला खरीद कराते हैं। कुछ समय तक रकम का लेनदेन ठीक तरीके से करते हैं। जब विश्वास जम जाता है तो अचानक रकम हड़प लेते हैं। हनुमानगंज थाने में दर्ज मुकदमे में नामजद व्यापारी अंकित व मोहित निवासी जनपद गौतम बुद्ध नगर को तमाम प्रयास के बाद पुलिस गिरफ्तार करके ले आई। दोनों पर किसानों का एक करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। पुलिस ने कार्रवाई तो की, लेकिन किसानों का डूबा धन नहीं निकला। ऐसे में जो भी व्यापारी व एजेंट केला क्रय करते हैं, उनका तहसील में रजिस्ट्रेशन कराया जाना जरूरी है। ट्रांसपोर्टर का भी सत्यापन किया जाना चाहिए। बाजार भाव के अनुरूप केले का मूल्य ऑनलाइन निर्धारित हो। क्षेत्रीय विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने कहा कि केला किसानों को सुविधाएं दिलाने की पहल की जा रही है। केला मंडी बने, फसल का उचित मूल्य मिले, आपदा में नुकसान का मुआवजा आदि दिलाने की कोशिश की जाएगी। किसान केले की खेती की ओर उन्मुुख हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें