यही कारण है कि नरवाजोत एक्सटेंशन से पिपराघाट के बीच पांच तो पिपराघाट से अहिरौली दान के बीच जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, जवही दयाल, चैनपट्टी, विरवट कोन्हवलिया, बाकखाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी और अहिरौलीदान के बीच हर एक दो किलोमीटर पर स्परों का निर्माण कराया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि शासन का 15 जून तक बांध बचाव कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम अब समाप्त हो गया, लेकिन एपी बांध पर न तो बांध बचाव की तैयारी पूरी हुई है और न ही स्परों की मरम्मत ही हो पाई है। ऐसे में अगर बाल्मीकिनगर बैराज से अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाता है तो बांध की सुरक्षा कभी भी खतरे में पड़ सकती है, जो इस क्षेत्र के लोगों के लिए अभिशाप साबित हो सकता है। बाढ़खंड के एक्सईएन भरतराम और एसडीओ पीसी त्रिपाठी बताते है कि सभी जगहों पर पैनी नजर रखी जा रही है और उन्हें हर हाल में सुरक्षित बनाया जाएगा।