पडरौना। शहरवासियों को जाम के झाम से बचाने के लिए ओवरब्रिज ही एकमात्र उपाय है। नगर के बीच से गुजरी रेललाइन पर बने पांच क्रासिंग हर रोज 10 से 12 बार बंद होते हैं। इस दौरान जाम की समस्या खड़ी हो जाती है। जाम में फंसे लोगों को निकलने में काफी वक्त भी लगता है। लोगों का कहना है कि बिना ओवरब्रिज बने, जाम की समस्या से निजात नहीं मिल सकता है।
जिला मुख्यालय होने की वजह से पडरौना नगर में दूर दराज के गांवों के लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इसके चलते देर शाम तक यहां की सड़कों पर दो पहिया और चार पहिया के वाहनों का दबाव बन रहता है। इसके अलावा पड़ोसी प्रांत बिहार का सीमावर्ती जनपद होने की वजह से भी बिहार के सीमावर्ती गांवों के लोग खरीदारी करने यहां आते हैं। जिसकी वजह से शहर में लोगों की भीड़ बनी रहती है। शहर में पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है।
हनुमान इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शैलेंद्र दत्त शुक्ल, प्रतिष्ठित व्यवसायी दीप नारायण अग्रवाल, पूर्वांचल किसान यूनियन के अध्यक्ष पप्पू पांडेय, प्रधानाचार्य सुनीता पांडेय, विजय मद्देशिया, अनूप मिश्रा, सुनील मद्देशिया, उमेश पांडेय आदि बताते है कि पडरौना नगर में जाम बड़ी समस्या है। जाम की वजह भी किसी से छिपी नहीं है। यहां यातायात नियम का पालन भी लोग ठीक प्रकार से नहीं करते हैं। पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है।
शहर के बीचो-बीच से होकर रेलवे लाइन गुजरती है। बावली चौक के पास खड्डा रोड, साहबगंज, नौकाटोला, कोतवाली रोड और नोनियापट्टी बाईपास रोड समेत कुल पांच रेलवे क्रासिंग है। किसी भी ट्रेन के आने-जाने पर रेल प्रशासन की तरफ से एक साथ पांचों रेलवे क्रासिंग बंद कर दिए जाते हैं। इससे पूरा शहर दो हिस्सों में बंट जाता है। इसके चलते शहर की रफ्तार कुछ देर के लिए थम जाती है। ढाला खुलने पर इनके आसपास करीब बीस मिनट से एक घंटे तक जाम की स्थिति बनी रहती है। इस दौरान जल्दी आगे निकलने की होड़ में कई बार छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। यदि शहर में ओवरब्रिज बनाया जाए तो जाम की समस्या समाप्त हो सकती है।
शहर में भीड़ कम करने के प्रयास नाकाफी
पडरौना के लोगों को जाम से बचाने के लिए सुबह नौ बजे से रात आठ बजे से नो एंट्री रहती है, फिर भी कई भारी वाहन शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाके में प्रवेश कर लोगों की मुश्किलें बढ़ा देते हैं। इसके अलावा कठकुईया रोड से नोनियापट्टी के रास्ते बाईपास बनाया गया, लेकिन वहां भी क्रॉसिंग है। ऐसे में बाइपास का कोई मतलब नहीं है।
टैक्सी स्टैंड शहर से बाहर बने
पडरौना शहर के बीच से एनएच 28-बी गुजरती है। इसके अलावा पडरौना-जटहां मार्ग के रास्ते बिहार जाने का मुख्य मार्ग है। हल्के और भारी वाहनों दिनभर आते-जाते हैं। इसलिए भी पडरौना नगर में ओवरब्रिज बनाने की जरूरत है। यदि ओवरब्रिज बन जाए तो हल्के समेत भारी वाहनों का दबाव कम होगा और लोगों को जाम की समस्या से निजात मिलेगी। ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर परमहंस बताते हैं कि जाम की समस्या न हो, इसके लिए पूरा प्रयास होता है। टेंपो स्टैंड, बस स्टैंड और टैक्सी स्टैंड, अनाज का गोदाम सब शहर से बाहर होने चाहिए। रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज होना चाहिए। बाईपास का चौड़ीकरण अथवा नगर से बाहर से बाईपास की आवश्यकता है। लोगों को चाहिए कि सड़क किनारे गाड़ियां न खड़ी करें और यातायात नियमों का पालन करें।