कुशीनगर। परिषदीय विद्यालय के बच्चों में बतौर शिक्षा मित्र करीब सत्रह वर्षों तक अपनी सेवा देने वाले शिक्षा मित्रों ने समायोजन के बाद अनेक सपने बुन रखे थे। किसी ने घर बनवाने के लिए लोन लेकर जमीन खरीद लिया था तो किसी ने घर बनवाना शुरू कर दिया था। ऐसे भी शिक्षा मित्र थे जो सहायक अध्यापक बनने के बाद अपने बच्चों को अच्छी तालीम देने के लिए बड़े शिक्षण संस्थानों में दाखिला करा दिए थे, ऐसे 2484 शिक्षा मित्रों को अपने अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है।
परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर दो चरणों में शिक्षा मित्रों का समायोजन किया गया था। इनके बीटीसी प्रशिक्षण के बाद पहले चरण का समायोजन 30 जुलाई 2014 को हुआ था, जिसमें 823 शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किए गए थे। इसके बाद दूसरे चरण का समायोजन 30 अप्रैल 2015 को हुआ। इसमें 1661 शिक्षा मित्र समायोजन के बाद सहायक अध्यापक बनाए गए थे। इस तरह दो चरणों में कुल 2484 शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बनकर परिषदीय विद्यालयों में अध्यापन कर रहे थे। अब भी अवशेष 342 शिक्षा मित्रों का समायोजन होना बाकी है। ये शिक्षा मित्र भी सहायक अध्यापक बनने के लिए कवायद में जुटे हुए थे।
सितंबर 2015 में हाईकोर्ट का फैसला खिलाफ में आने के बाद शिक्षा मित्र पहले ही चिंतित थे, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से समायोजित शिक्षकों को और भी बड़ा झटका लगा है, क्योंकि सहायक अध्यापक बनने के बाद से इन्होंने अपने लिए घर बनवाने से लेकर बच्चों की अच्छी तालीम सहित कई सुनहरे सपने बुन रखे थे।