कुशीनगर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टरों ने राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर मंगलवार को क्लीनिक और अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रखी। 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत डॉक्टरों ने छह जून को राष्ट्रव्यापी हड़ताल और दिल्ली में रैली निकालने की घोषणा की थी। डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों और उनके साथ अस्पताल व क्लीनिक पहुंचे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर केंद्रीय स्तर से चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों पर हिंसा व उपद्रव के खिलाफ कड़ा कानून बनाने, मेडिकल छात्रों पर नेशनल एक्जिट टेस्ट के प्रस्ताव को खारिज करने, डॉक्टरों एवं प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन एकल विंडो से किए जाने, चिकित्सकों को पर्चा लिखने की स्वायत्तता तथा एलोपैथी दवाओं की पर्ची लिखने का अधिकार सिर्फ इसी पैथी के चिकित्सकों एमबीबीएस एवं बीडीएस को देनेे की मांग को लेकर मंगलवार को हड़ताल पर रहे। इसके अलावा डॉक्टर हेल्थ सेक्टर का बजट एक प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत किए जाने, झोला छाप डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर कड़ाई से रोक लगाने, पीसीपीएनडीटी एक्ट, सीईए और वेस्ट बंगाल सीई एक्ट में संशोधन, इंटर मिनीस्ट्रियल कमेटी के प्रस्ताव को छह सप्ताह में लागू करने सहित 11 मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। अपनी मांगों के समर्थन में आईएमए के डॉक्टरों ने कुशीनगर जिले में न केवल निजी अस्पताल बंद रखे, बल्कि दिल्ली जाकर संगठन की रैली में भी शामिल भी हुए। उधर, डॉक्टरों के आंदोलन के कारण मरीजों व तीमारदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल में डॉ. एसपी मल्ल, डॉ. सीके त्रिपाठी, डॉ. द्वारिका प्रसाद, डॉ. विपिन बिहारी चौबे, डॉ. वीके सिंह, डॉ. एके सिंह, डॉ. एडीबीपीएन सिंह, डॉ. बीएन तिवारी, डॉ. देवशरण सिंह, डॉ. केपी गोंड, डॉ. गायत्री पांडेय, डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. सिद्धार्थ पांडेय, डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. संदीप अरुण श्रीवास्तव, डॉ. सुरभि श्रीवास्तव, डॉ. राजीव कुमार मिश्रा सहित इस संगठन से जुड़े जिले भर के करीब 55 डॉक्टर शामिल थे। आईएमए कुशीनगर इकाई के अध्यक्ष डॉ. बीके बरनवाल भी दिल्ली की रैली में शामिल होने गए थे। उन्होंने बताया कि यह रैली राजघाट से शुरू होकर इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम तक गई, जिसमें देशभर के डॉक्टर शामिल हुए।