जटहां बाजार (कुशीनगर)। नेपाल से भटककर बुधवार की सुबह जरार गांव में आए गैंडा के पूरी रात रहने के बाद बृहस्पतिवार की भोर में फिर बिहार चले जाने की बात कही जा रही है। हालांकि रात में वन विभाग का कोई भी अधिकारी उसकी निगरानी में नहीं रहा। गैंडा के बिहार में चले जाने से क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
नेपाल में आई बाढ़ के दौरान कई गैंडे पानी में बहकर बिहार के रेता क्षेत्र में आ गए थे। उनमें से एक गैंडा यूपी और बिहार बार्डर के परसौनी क्षेत्र में करीब एक महीने से घूम रहा था। उसे पकड़ने के लिए बिहार के वन विभाग के कर्मचारी लगे थे, लेकिन वह सभी को चकमा देकर भागने में सफल रहा।
बुधवार की सुबह जटहां बाजार थाना क्षेत्र के माघी कोठिलवा गांव से होते हुए वह गैंडा कंठीछपरा गांव में चला आया। सुबह करीब छह बजे लोगों ने उस गैंडा को देखते ही शोर मचाया। हो हल्ला के बाद करीब सुबह करीब नौ बजे वह जटहां बाजार थाने के सामने स्थित जरार गांव के एक गन्ने के खेत में छिप गया। पूरा दिन और रात उसी में बैठा रहा। खेत में उसके पैरों के निशान भी देखे गए हैं।
बृहस्पतिवार की भोर में करीब तीन बजे गैंडा के बिहार के दियारा क्षेत्र में चले जाने की बात कही जा रही है। लोगों के मुताबिक रात में वन विभाग की तरफ से कोई निगरानी नहीं की गई, जिससे उसकी सही सही जानकारी मिल सके। हालांकि उसके बिहार में जाने की सूचना से क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है। जटहां बाजार, जरार, माघी कोठीलवा, कटाई भरपुरवा गांव के अधिकांश लोगों के खेत बिहार के दियारा क्षेत्र में होने से वहां जाने से कतरा रहे हैं।
बिहार के पिपरासी थाने के प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि गैंडा के आने की सूचना पर दियारा क्षेत्र के अगल बगल के गांवों के लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस उस गैंडे पर नजर रखे हुए है। इस संबंध में पडरौना रेंजर घनश्याम शुक्ल ने बताया कि भोर में गैंडा बिहार के तरफ चल गया है।