पडरौना। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग के दावों के बावजूद बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जिले में पंजीकृत 1,672 स्कूली वाहनों में से 141 वाहनों की फिटनेस समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद इन वाहनों के सड़कों पर दौड़ने की आशंका बनी हुई है। ऐसे वाहनों से बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने में हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है।
स्कूल खुलने के साथ ही सुबह और दोपहर के समय सड़कों पर बड़ी संख्या में स्कूली वाहन दिखाई देते हैं। इनमें कई वाहन ऐसे भी हैं, जिनकी फिटनेस जांच की अवधि समाप्त हो चुकी है।
नियमानुसार फिटनेस प्रमाण पत्र के बिना किसी भी वाहन का संचालन नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी निगरानी और कार्रवाई में ढिलाई के कारण नियमों की अनदेखी हो रही है।
जिले में निजी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बस, वैन और अन्य वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहनों की फिटनेस, अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार किट, आपातकालीन द्वार, सीटों की स्थिति और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है। फिटनेस समाप्त होने के बाद वाहन सड़क पर चलने के लिए सुरक्षित है या नहीं, इस पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
स्कूली वाहनों की नियमित जांच और कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग की ओर से अभियान चलाए जाते हैं। अभियान के दौरान अनफिट और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर जुर्माना लगाने के साथ उन्हें सीज भी किया जाता है। लेकिन अभियान की निरंतरता कमजोर पड़ने पर संचालकों की मनमानी बढ़ जाती है।