पडरौना। जिला अस्पताल में मरीजों की इतनी संख्या बढ़ गई है कि बेड तक नहीं मिल पा रहे हैं। पिछले चार दिनों में 607 मरीज भर्ती कराए गए हैं, जिसमें 33 रेफर हुए हैं, जबकि 13 ऐसे मरीजों की मौत हुई है, जिनमें हीट स्ट्रोक जैसे लक्षण दिख रहे थे। डॉक्टर मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए इमरजेंसी से इलाज कर घर जाने की सलाह दे रहे हैं। इलाज को लेकर बीमार लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। पर्ची काउंटर से लेकर ओपीडी तक 200 मीटर पैदल भ्रमण और आधे घंटे इंतजार के बाद लोगों को इलाज मुहैया हो रहा है। बावजूद ओपीडी में डॉक्टर समय से नहीं आ रहे हैं।
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की पर्ची अब एमसीएच विंग में बन रही है। ओपीडी पर्ची के लिए सुबह 7 बजे से ही लोग कतार में लग जा रहे हैं। सोमवार को दिन में एक बजे तक दवा काउंटर और पर्ची रजिस्ट्रेशन काउंटर से कतार नहीं टूटी थी। पर्ची काउंटर से ओपीडी की दूरी करीब 200 मीटर बढ़ गई है। ओपीडी वाले मकान में इमरजेंसी विभाग है। इमरजेंसी में बीस मिनट इंतजार तो ओपीडी में आगा घंटा इंतजार के बाद लोगों को इलाज मिल रहा है।
सोमवार को ओपीडी के कई कमरों में डॉक्टर नहीं बैठे थे, मरीज पर्ची जमा कर उनके आने का इंतजार कर रहे थे। तुर्कपट्टी क्षेत्र के मछहरिया गांव से दंपति अपने तीन साल के बेटे जन्नत को इलाज के लिए लेकर आए थे। उन्होंने बताया कि कक्ष संख्या पांच में 1.30 बजे तक डॉक्टर नहीं बैठे थे। तेज बुखार से सुस्त पड़े बेटे को फर्श पर लिटाकर पहले चले इलाज में मिली दवा पिला रही मां और बाप परेशान थे। उनका कहना था कि सुबह 10 बजे से डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक आए नहीं है और यहां कोई सुनने वाला भी नहीं है।
इस दौरान दो युवक पहुंचे और दो तीन डॉक्टरों का नाम लेकर बोले कि वे लोग अपने आवास पर बैठे हैं वहीं जाइए। मरीज अपनी-अपनी पर्ची लेकर संबंधित डॉक्टरों के आवास की ओर दौड़ पड़े। इमरजेंसी हाल में चकिया की 10 वर्षीय रानी, नैनू पहरू गांव की निवासी नौ वर्षीय निशा समेत सात लोग भर्ती किए गए थे, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार से सभी पीड़ित थे। छत पर लगे पंखे धीमी गति से चल रहेे थे। गर्मी इतनी थी कि तीमारदार सरकारी सिस्टम को कोसते हुए घर से लाए हाथ का पंखा झल रहे थे।
50 बेड के जनरल वार्ड में 83 मरीजों को भर्ती किया गया है। रात को गैलरी में बीस और बेड बढ़ाए गए, बावजूद एक बेड पर दो मरीजों को रखना पड़ रहा है। हीट स्ट्रोक लक्ष्ण के मोतीचंद, गीता, बरवाकला गांव की इंद्रावती 40, सिधुआं बांगर की फूलमती 45, नेबुआ नौरंगिया के लीलाधर छपरा गांव की बिंदा देवी, तुर्कपट्टी के मोतीचंद 70, रामकोला की रेनू 25 भर्ती थीं। अधिकांश मरीजों में हीट स्ट्रोक के लक्ष्ण हैं।
मरीजों की संख्या हुई तीन गुनी, पंखे दे रहे गर्म हवा
- सोमवार को 1,128 नए मरीजों ने ओपीडी में इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि 300 से अधिक पुराने मरीज भी इलाज के लिए पहुंचे थे। दवा काउंटर के पास कुर्सियों पर लोग बैठे थे, अंगोछे से माथे का पसीना पोछ रहे थे। छत में लगे पंखे खराब पड़े थे, जबकि तेज बुखार या हीट स्ट्रोक लक्षण वाले आ रहे मरीजों को इलाज के दौरान डॉक्टर शरीर को ठंडे पानी से धुलने या पंखे की नीचे रखने की सलाह दे रहे हैं। अत्यधिक गर्मी व उमस की वजह से जिला अस्पताल व वार्डों में लगे पंखे आग उगल रहे हैं।