कुशीनगर। बिहार के 62 से अधिक गांवों को गंडक नदी की त्रासदी और कटान से बचाने के लिए वहां का सिंचाई विभाग ड्रोजर मशीन के सहारे नदी की धारा मोड़ने में जुट गया है। इसके कलपुर्जों को जोड़ने का काम पिछले एक सप्ताह से चल रहा था। यह मशीन रविवार को नदी में यूपी बार्डर पर उतारी गई।
बड़ी गंडक नदी की बाढ़ से कुशीनगर के अहिरौलीदान, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, बांकखास, बाघाचौर, बिरवट कोन्हवलिया, जवहीं दयाल, चैनपट्टी, घघवा जगदीश, बिनटोली, जंगलीपट्टी, पिपराघाट, नरवाजोत सहित अन्य कई गांवों पर कटान का खतरा बना हुआ है। वहीं बिहार के भैसहीं, शलैपुर, खेम, काला मटिहनिया, विशुनपुर, बरईपट्टी, विशंभरपुर, भगवानपुर, रमजीता, जादोपुर सहित 62 गांवों पर भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इसके चलते बिहार के सिंचाई विभाग की सक्रियता बढ़ गई है। गंडक नदी से हर साल होने वाले भारी नुकसान को देखते हुए बिहार के सिंचाई विभाग की तरफ सेे पटना से एक बड़ी ड्रोजर मशीन पिछले सप्ताह मंगाई गई थी। मशीन काफी बड़ा होने के कारण उसे कई हिस्सों में खोल कर पहले ट्रकों से बांकखास लाया गया और बाद में क्रेनों की मदद से जोड़ने का काम शुरू हुआ था। बिहार के सिंचाई विभाग के अभियंताओं का मानना है कि अगर गंडक नदी के बीच में गहराई को बढ़ाकर एक निश्चित दायरे में बहाव का रास्ता बना दिया जाए तो नदी की धारा का विस्तार सिमट जाएगा और तटवर्ती गांवों पर से नदी का दबाव कम हो जाएगा। इससे तटवर्ती गांवों में बचाव कार्य तेज कर उन्हें सुरक्षित किया जा सकता है। पिछले एक सप्ताह से इस ड्रोजर मशीन के कलपुर्जों को जोड़ने का काम चल रहा था, जिसे पूरा होने के बाद रविवार को नदी में उतार दिया गया। इस ड्रोजर मशीन के चालक रमेश तिवारी व जुगुन सिंह ने बताया कि ड्रोजर मशीन का वजन 45 टन है। इसमें एक घंटे में 35 लीटर डीजल इस्तेमाल होता है। इस मशीन से गंडक नदी की धारा को मोड़ने का प्रयास रविवार को आरंभ कर दिया गया।