सीओ जियाउल हक हत्याकांड में मुख्य आरोपी बनाए गए बंटी (बदला हुआ नाम) को किशोर न्याय बोर्ड भेजे जाने के अगले ही दिन सोमवार को सीबीआई ने उसके बालिग होने का दावा पेश किया है।
अपने दावे के समर्थन में सीबीआई ने अदालत में उसके स्कूल सर्टिफिकेट पेश किए हैं, जिसमें वह पढ़ता था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि बंटी के वकीलों ने उसकी उम्र से संबंधित जो दस्तावेज कोर्ट में पेश किया, उसमें ओवर राइटिंग कर सच को छुपाने की कोशिश की गई है।
कुंडा कांड में मारे गए ग्राम प्रधान नन्हें ने अपने पिता दुखीराम के नाम से दुखीराम पूर्व माध्यमिक स्कूल खोला था। सीबीआई ने यह जानकारी हासिल की है कि बंटी ने इस स्कूल में 1999 में कक्षा एक में दाखिला लिया था।
कक्षा एक से कक्षा पांच तक के स्कूल के दस्तावेजों में उसकी जन्म तिथि 1994 दर्ज है जबकि कक्षा छह में उसके स्कूल के दस्तावेज में वास्तविक उम्र पर व्हाइटनर लगाकर इसे 1996 किया गया है।
सीबीआई स्कूल की प्रधानाचार्य से इसकी प्रमाणित प्रति और वह दस्तावेज भी ले आई है, जिसमें व्हाइटनर लगाया गया।
सीबीआई की दलील है कि सजा से बचने के लिए और पूरे मामले में संशय की स्थिति लाने के लिए वकीलों ने सोची समझी साजिश के तहत अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई है।