उत्तर प्रदेश में पांच साल की मासूम किरन की आंखों के सामने उसकी मां को फांसी के फंदे पर लटकाकर मौत के घाट उतार दिया गया।
उसकी मासूम निगाहों ने मां के साथ हुई दरिंदगी का यह खेल अपनी आंखों से देखा, लेकिन इस मासूम के नन्हे हाथ इन दरिंदों का विरोध भी नहीं कर पाए।
किरन की मानें तो उसकी मां को मारने वाले कोई और नहीं, बल्कि उसके अपने ही दादा-दादी और चाचा थे। अफसोस तो यह है कि मां को कत्ल करते समय कातिलों के जेहन में रत्ती भर भी यह ख्याल नहीं आया कि आखिर उसके बाद उसकी मासूम बच्ची का क्या होगा।
किरन अपनी मां को बेशक न बचा पाई हो, लेकिन खेलने-कूदने की उम्र में वह अपनी मां को इंसाफ दिलाने के लिए कमर कस चुकी है।
वह अपने ही घर वालों के खिलाफ बयान देने को भी तैयार है, लेकिन पुलिस उसके मकसद में रोड़ा बन रही है।
मृतका के मायके वाले अपने वकील की मदद से इस मासूम को न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। थाना चंदपा क्षेत्र के गांव कुम्हरई निवासी सुनील पत्नी लटूरी की हत्या पिछले माह 24 जून को कर दी गई थी।
इस हत्या की रिपोर्ट थाना चंदपा में उसके ससुर रामसरन, सास गंगा देवी और देवर धर्मलाल के खिलाफ धारा 498ए और 302 के तहत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने एक आरोपी रामसरन को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अभी अन्य आरोपी फरार हैं। मृतका की पांच साल की बेटी किरन खुद को अपनी मां की हत्या का चश्मदीद गवाह बताती है।
बच्ची को मृतका के मायके वाले यहां जिला न्यायालय में अधिवक्ता यज्ञदत्त गौतम के पास लेकर आए। वहां बच्ची ने बताया कि उसकी मां की हत्या उसके दादा, दादी और चाचा ने फांसी पर लटका कर की थी।
मृतका के मायके वालों का आरोप है कि इस घटना को 2 सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक विवेचक ने बच्ची के बयान ही दर्ज नहीं किए हैं।