शासन ने शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के आरक्षण की अनंतिम सूची जारी कर दी है। इसमें कौशाम्बी जनपद को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इसी के साथ ही महीनों से चुनावी तैयारियों में जुटे जिले के आधा दर्जन दिग्गज मायूस हो गए।
इस बार मिनी सदन में ताजपोशी के लिए जिले के दो सियासी दिग्गज अपनी तीसरी पीढ़ी को चुनावी जंग में उतारने की तैयारी कर रहे थे। करवरिया परिवार से विधायक नीलम करवरिया ने अपने भतीजे गौरव करविया, द्विवेदी परिवार से अविनाश द्विवेदी ने अपने बेटे सार्थक द्विवेदी को मैदान में उतारने की पूरी तैयारी कर ली थी। दोनों की बड़ी-बड़ी होर्डिंग भी जिले भर में लगवा दी गई थी। योजना थी कि सीट सामान्य हुई तो भाजपा के बैनर तले पूरी ताकत से ताल ठोंकेंगे।
लेकिन शुक्रवार को शासन ने एससी महिला के लिए सीट आरक्षित कर महीनों से चल रही तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है। इसी तरह पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने पर निवर्तमान अध्यक्ष अवधरानी के बेटे जगजीत पटेल और धर्मराज मौर्या भी चुनावी तैयारी में थे। जबकि सपा की ओर से पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक यादव, आनंद मोहन पटेल और बसपा से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश कुशवाहा समेत कई अन्य चेहरे तैयारी कर रहे थे।
एससी महिला के लिए सीट आरक्षित होने से दिग्गज हैरान
शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित होने से दोआबा के सियासी दिग्गज हतप्रभ हैं। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सीट ओबीसी महिला या सामान्य वर्ग के खाते में जाएगी। मगर, ऐसा नहीं होने से लोग आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में जुट गए हैं।
एक दिन पहले शासन की ओर से घोषित आरक्षण नीति को लेकर जिले के कई सियासी दिग्गज उत्साहित थे। दरअसल, शासन ने चक्रानुक्रम फार्मूले पर सीटें आरक्षित करने का निर्णय लिया था। इसके मुताबिक जो पद 1995 से 2015 तक यानी पिछले चुनावों में कभी आरक्षण के दायरे में नहीं आए, उनको प्राथमिकता के आधार पर आरक्षित किया जाना था। इसके हिसाब से कौशाम्बी जनपद में अब तक हुए आरक्षण को ध्यान में रखकर सियासी गुणा-गणित बैठा रहे थे।
दरअसल, चार अप्रैल 1997 को दोआबा को प्रयागराज जनपद से अलग कर कौशाम्बी जनपद के रूप में मान्यता दी गई थी। जिले में पहली बार वर्ष 1999 में अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ था। अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित सीट पर भाजपा समर्थित पुष्पा देवी जनपद की पहली जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं थीं। वर्ष 2000 के चुनाव में सीट सामान्य हुई तो भाजपा प्रत्याशी कपिल मुनि करविया अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 2005 में एससी महिला के लिए आरक्षित सीट पर सपा की मधुपति वाचस्पति अध्यक्ष चुनीं गईं।
2010 में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर बसपा के राजेश कुशवाहा निर्वाचित हुए। 2015 में सामान्य महिला सीट पर पहले मधुपति और बाद में हुए दो उपचुनावों में अनामिका पटेल व अवधरानी पटेल अध्यक्ष बनीं। इस लिहाज से कौशाम्बी में एक भी बार सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित नहीं हुई है। इसी कारण सियासी दिग्गज आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में बीवी इफ्फन ने किया था काम
चार अप्रैल 1997 को कौशाम्बी जनपद के गठन के बाद जिला पंचायत भी अलग कर दिया गया था। उन दिनों अध्यक्ष के साथ जिला पंचायत में उपाध्यक्ष का चुनाव होता था। नया जिला बनने के बाद प्रयागराज जनपद की उपाध्यक्ष रही बीवी इफ्फन को चुनाव होने तक कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में जिला पंचायत में काम करने का मौका मिला था।
1999 में हुआ था पहले जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव
जिले की मान्यता मिलने के करीब डेढ़ साल बाद वर्ष 1999 में कौशाम्बी में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। एससी महिला के लिए आरक्षित सीट पर भाजपा की पुष्पा देवी को जनपद की पहली जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। हालांकि, उनका यह कार्यकाल थोड़े समय रहा।
कब-कौन रहा जिला पंचायत अध्यक्ष
वर्ष आरक्षण निर्वाचति अध्यक्ष
1999 एससी महिला पुष्पा देवी
2000 सामान्य कपिल करवरिया
2005 एससी महिला मधुपति वाचस्पति
2010 ओबीसी राजेश कुशवाहा
2015 सामान्य महिला मधुपति वाचस्पति
2017 सामान्य महिला अनामिका पटेल (उपचुनाव)
2019 सामान्य महिला अवधरानी पटेल (उपचुनाव)
अनुसचित जाति के लिए आरक्षित की गई ब्लॉक प्रमुख की तीन सीटें
जिला और ग्राम पंचायत के साथ ही शासन ने शुक्रवार की देर शाम क्षेत्र पंचायत प्रमुख (ब्लॉक प्रमुख) पद का भी आरक्षण घोषित कर दिया है। इसके मुताबिक जिले के आठ ब्लॉकों में अनुसूचित जाति के लिए तीन सीटें आरक्षित की गई हैं। इनमें से एक पर एससी महिला का कब्जा होगा।
इसी तरह से पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित दो सीटों में एक एक सीट महिला के लिए रिजर्व की गई है। जबकि अनारक्षित तीन सीटों में भी एक पद महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इस तरह से देखा जाए तो आठ में तीन ब्लॉकों पर आधी आबादी का कब्जा होगा।