मेडिकल कॉलेज के निकट स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान सड़क हादसे में घायल युवक की मौत हो गई। इलाज में लापरवाही के साथ ही दो घंटे तक मौत की बात को दबाए रखने का आरोप लगाकर परिजनों ने हंगामा किया। कार्रवाई का आश्वासन देकर इंस्पेक्टर ने किसी तरह शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
सैनी कोतवाली के भरेठा बाग निवासी मोहित यादव (28) टाइल्स का कारीगर था। बृहस्पतिवार को वह अपने काम के सिलसिले में साइकिल से अजुहा जा रहा था। इसी दौरान टांडा मोड़ के पास एक प्राइवेट बस की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
एंबुलेंस से घायल को मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हालत नाजुक देख प्रयागराज स्थित एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया। घर वाले प्रयागराज ले जाने के बजाय मेडिकल कॉलेज के समीप स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की खबर मिलने के बाद परिजन भड़क उठे।
मृतक के पिता देशराज, मां शांति, भाई दीपक समेत अन्य परिजनों व रिश्तेदारों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव को अस्पताल के बाहर रखकर धरने पर बैठ गए। घटना की सूचना पर सदर कोतवाली से पुलिस टीम आई। कोतवाल राजकिशोर ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीएमओ डॉ. संजय सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है। शिकायती पत्र मिलने पर टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।
बेहतर उपचार का झांसा देकर लाया था मेडिकल स्टोर संचालक
मृतक के पिता और भाई ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के जवाब देने के बाद वह लोग प्रयागराज ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच अस्पताल के पास ही मेडिकल स्टोर चलाने वाला एक शख्स आया। बेहतर इलाज का झांसा देकर वह लाइफ केयर हॉस्पिटल लाया था।
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दो घंटे तक नहीं दी बेटे के मौत की जानकारी
देशराज ने बताया कि शाम करीब चार बजे ही बेटे की हालत बिगड़ने लगी थी। उसी दौरान उसकी मौत भी हो गई। लेकिन, अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों ने इसकी कोई जानकारी दी। शाम करीब छह बजे अचानक प्रयागराज के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद बेटे की मौत की जानकारी हुई।
मंझनपुर के निजी अस्पताल में मोहित यादव की मौत के बाद परिजनों कों समझाती पुलिस। संवाद