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बंद मुठ्ठी से सरक गई रेत, हाथ हुए खाली

Fri, 03 Mar 2017 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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crime
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कौशाम्बी में मिलने वाली बालू एक नंबर की कही जाती है। सरकारी कार्यों के लिए यहां का सैंपल सबसे पहले भेजा जाता है। इसी बालू के दम पर कौशाम्बी के बालू ठेकेदार इतराते थे। ठेकेदारी की आड़ में कारोबारियों ने अवैध खनन का खेल शुरू किया तो यह बंद नहीं हुआ। नतीजतन सीबीआई की ऐसी मार पड़ी कि जिले में एक किलो बालू निकालना मुश्किल हो गया है। बालू निकासी बंद होने से सरकारी व गैर सरकारी सभी कार्य बंद हो गए हैं। मजबूरन कुछ लोग पत्थर का चूरा (डस्ट) से निर्माण करवा रहे हैं, लेकिन पलस्तर नहीं हो पा रहा है। बालू निकासी बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार भी हो चुके हैं।
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    बालू की खान के रूप में पहचान रखने वाले जिले के लोगों के समक्ष भी मोरंग यानि बालू का संकट खड़ा हो गया है। अप्रैल माह में वैध बालू के पट्टों के खत्म होने के बाद सिंडीकेट के सहारे बड़े पैमाने पर अवैध खनन जुलाई माह तक हुआ। अवैध खनन की बालू को जिले भर में जगह-जगह डंप किया गया। अगस्त में सीबीआई आई तो डंप बालू को सीज करते हुए इलाकाई पुलिस व खनन विभाग के हवाले कर दिया था। सीबीआई के लौटते ही कारोबारियों ने सीज बालू को रात के अंधेरे में बेंचकर मोटी रकम कमाने का काम किया। चोरी से ही सही पर निर्माण कार्य चल रहा था। मौजूदा हालात यह हो गए हैं कि डेढ़ावल को छोड़ जिले भर की सीज बालू भी खत्म हो गई है। ऐसे में अब निर्माण कार्यों पर बालू न होने से अड़ंगा लग गया है। बानगी के तौर पर विकास खंड सिराथू के भड़ेसर गांव को लिया जा सकता है।

यहां के तीन सौ लाभार्थियों को शौचालय दिया गया है। बालू के अभाव में निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पा रहा। यही हाल सरकारी भवनों का है। जनपद न्यायालय हो या फिर सदर कोतवाली में बनने वाले भवन। बालू के अभाव में निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप है। सबसे बुरा हाल तो लोहिया समग्र गांवों में सीसी रोड व केसी ड्रेन निर्माण व 14 वें वित्त की रकम से कराए जाने वाले कार्यों का है। बानगी के तौर पर कौशाम्बी ब्लॉक के म्योहर गांव को लिया जा सकता है। यहां पर नालियों के ऊपर लगे ढक्कन पूरी तरह से टूटकर ध्वस्त हो चुके हैं। ढक्कन बनवाने के लिए ग्राम प्रधान दिनेश गौतम ने गिट्टी व सीमेंट का इंतजाम तो कर लिया पर बालू के अभाव में नालियों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। बालू न मिलने से आम आदमी के अलावा अफसर भी हलाकान हैं। जिले में बालू निकासी कब तक शुरू होगी इस बावत अभी तस्वीर साफ नहीं दिख रही है।
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