राजकीय बालिका इंटर काॅलेज सिराथू परिसर में बालिकाओं के लिए छात्रावास बना है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। शौचालय सहित अन्य सुविधाएं भी यहां देखने को नहीं मिली। हालांकि विभाग का दावा है कि यहां 19 छात्राएं रहती हैं। परिसर की इंटरलॉकिंग का काम बरसात के बाद शुरू होगा।
नगर पंचायत सिराथू के राजकीय बालिका विद्यालय में बालिका छात्रावास है। इस छात्रावास में पढ़ाई के लिए घर से आने जाने में समस्या झेलने वाली बालिकाओं को आवासीय व भोजन की सुविधा मिलेगी। बालिकाएं यहां रहकर आसपास के किसी भी विद्यालय में पढ़ सकती हैं। दरअसल, पांच साल पहले करीब ढाई करोड़ की लागत से छात्रावास का निर्माण कराया गया था।
दो साल पहले यहां छात्राओं की देखरेख के लिए वार्डन और अन्य कर्मचारियों की तैनाती भी कर दी गई। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को राजकीय विद्यालय की प्रधानाचार्य पुष्पा देवी सहित पांच अध्यापक पढ़ाई में मदद करती हैं।
परिसर में जलभराव से
दो मंजिला छात्रावास में 100 बालिकाओं को रहने की सुविधा है। इसके लिए वार्डन के अलावा चौकीदार और रसोइयां की नियुक्ति की गई है लेकिन अव्यवस्था के चलते संचालन नहीं हो रहा है। आलम यह है कि परिसर में जलभराव है। झाड़ियां उगने से परिसर तक पहुंचना कठिन होता है। प्रधानाचार्य पुष्पा ने बताया निर्माण के बाद कार्यदायी संस्था की ओर से छात्रावास को हस्तांतरित कर दिया गया है। रास्ते का निर्माण नहीं हो सका। इससे संचालन में परेशानी हो रही है। ऐसे में छात्राओं को प्रतिदिन घर से ही विद्यालय आना जाना पड़ता है।
मुख्यालय में बनाया जाता तो होता बेहतर
मंझनपुर। बालिका छात्रावास सिराथू में बनाया गया है। जबकि, इसका निर्माण मंझनपुर में होना चाहिए। समाजसेवी विनय पांडेय, राजू केसरवानी और अनूप जायसवाल आदि ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र की तमाम बालिकाएं हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे में उनको हॉस्टल की सुविधा मिलती तो वह बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकती थी लेकिन हास्टल का निर्माण सिराथू में किया गया है। यहां पहले से ही पढ़ाई की बेहतर सुविधा नहीं है। यहां महामाया डिग्री कॉलेज के अलावा तमाम विद्यालय हैं। पास में ही कौशल विकास केंद्र, डायट समेत अन्य कई संस्थान हैं।
छात्रावास के लिए 19 छात्राओं ने आवेदन किया है। बरसात के बाद परिसर की इंटरलॉकिंग कर दी जाएगी।-राजेश कुमार सिंह, डीआईओएस