चायल क्षेत्र के बलीपुर टाटा गांव की रहने वाली महिला नसबंदी के तीन साल बाद गर्भवती हो गई। पांच महीने पहले उसे अनचाहा गर्भ ठहर गया। पीड़िता ने बृहस्पतिवार को मामले की शिकायत जिलाधिकारी के साथ एसडीएम और सीएमओ से करते हुए मदद की गुहार लगाई है। बता दें कि नसबंदी के बाद विवाहिताओं के लगातार गर्भवती होने की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की सारी पोल खोल दी है। छोटा-परिवार, सुखी-परिवार प्लान दोआबा में दिखावा साबित हो रहा है। उच्चाधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा गांव की भोली-भाली विवाहिताओं को भुगतना पड़ रहा है।
चायल तहसील क्षेत्र के बलीपुर टाटा गांव की रहने वाली प्रेम कुमारी पत्नी प्रेम कुमार ने बताया कि पांच बेटी और एक बेटा पैदा होने के बाद तीन साल पहले उसने चायल पीएचसी में नसबंदी कराई थी। पांच महीने पहले उसे गर्भ ठहर गया। कुछ दिनों तक तो वह कुछ समझ नहीं पाई। इसके बाद स्थानीय चिकित्सक के पास पहुंचकर जांच कराने पर पता चला कि उसे पांच माह का गर्भ है। नसबंदी कराने के बाद गर्भवती होने की जानकारी होते ही विवाहिता के होश उड़ गए। बृहस्पतिवार को पीड़िता ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से की। इससे पहले कोखराज के कसिया गांव की रहने वाली सुमन देवी भी नसबंदी के बाद गर्भवती हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का परिवार नियोजन कार्यक्रम दोआबा में खोखला साबित हो रहा है। चिकित्सकों की लापरवाही और अफसरों की अनदेखी गांव के गरीब परिवार भुगतने को मजबूर है।
चायल क्षेत्र की रहने वाली सावित्री के बाद अब सुमन और प्रेमा के घर अनचाहे बच्चे की किलकारी गूंजेगी। तीन साल पहले परिवार नियोजन कराने के बाद यह महिलाएं गर्भवती हुई हैं। यह तो बानगी है। इससे पहले भी कई घरों में अनचाही किलकारी गूंज चुकी है। ऐसे में नसबंदी के दौरान बरती गई लापरवाही का जिम्मेदार कौन है। अफसरों की अनदेखी और खामोशी ने कल्याणकारी योजना की स्थिति दयनीय कर दी है।
बता दें कि चायल तहसील क्षेत्र के लोधौर गांव की रहने वाली सावित्री ने पांच बेटियों के पैदा होने के बाद 14 फरवरी 2013 को चायल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी कराई थी। सावित्री देवी ने बताया कि 12 मार्च 2016 को उसके घर अनचाही किलकारी गूंज उठी। उसने एक बच्ची को जन्म दिया। पांच बेटियों के बाद फिर एक बच्ची पैदा होने से परिजनों के होश उड़ गए। इसी तरह कसिया गांव की रहने वाली सुमन देवी और बलीपुर टाटा गांव की प्रेमा देवी ने भी पांच-पांच बेटियों के बाद नसबंदी कराई थी। सावित्री के बाद अब इनके घर आंगन में अनचाहे बच्चे की किलकारी गूंजेगी। नसबंदी के तीन साल बाद विवाहिताएं कैसे गर्भवती हुईं, क्या ऑपरेशन के दौरान चिकि त्सकों ने लापरवाही बरती थी। इसकी जांच में भले ही चाहे जो रिपोर्ट आए पर इन विवाहिताओं पर तो संकट आ ही गया।
नसबंदी के बाद वहीं विवाहिताएं गर्भ धारण करती हैं। जिनके गर्भाशय में लगाई गई रिंग ढीली हो जाती है। दो चार केस ऐसे आ सकते हैं। पीड़ितों को 30 हजार रुपये की मदद भी विभाग करता है। आवेदन के बाद उन्हें रकम उपलब्ध करा दी जाती है।
डॉ.यूबी सिंह
मुख्य चिकित्साधिकारी कौशाम्बी