नवरात्र में देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के बीच क्षेत्र की महिलाएं शिक्षा, जनसेवा और सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। कोई पुलिस अधिकारी बनकर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही है, तो कोई चिकित्सक के रूप में मरीजों की सेवा कर रही है। वहीं, शिक्षिका बच्चों का भविष्य संवारने और समाजसेवी महिलाओं व बालिकाओं को न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। अपने काम के प्रति समर्पण और संघर्ष से इन महिलाओं ने दूसरी महिलाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा की मिसाल पेश की है।
वर्दी पहनकर निभा रहीं सुरक्षा की जिम्मेदारी
अपर पुलिस अधीक्षक अमिता सिंह मूल रूप से सुल्तानपुर की निवासी हैं। उनका सपना वैज्ञानिक बनने का था। उन्होंने समाजशास्त्र से एमए और एलएलबी की पढ़ाई की। पिता आईजी सूर्य नारायण सिंह की प्रेरणा से तैयारी की और वर्ष 2007 में पीपीएस में चयनित हुईं। वर्ष 2022 में पदोन्नति के बाद वह एएसपी बनीं। वर्तमान में कौशांबी में तैनात हैं। उनका कहना है कि पीड़ितों की मदद करने से उन्हें दिल से सुकून मिलता है।
भरवारी निवासी डॉ. मंजुला गुप्ता ने कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया। वर्ष 1986 में चिकित्सा सेवा शुरू की। विभिन्न अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जिम्मेदारी निभाने के बाद वर्तमान में सीएचसी सिराथू में तैनात हैं। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा करने से उन्हें आनंद की अनुभूति होती है।
नेवादा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर की प्रधानाध्यापिका सुमन कुशवाहा को उत्कृष्ट शिक्षण के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उन्हें सम्मानित किया। वह गतिविधि आधारित शिक्षण से बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाने और शैक्षिक स्तर सुधारने में जुटी हैं।
सदर ब्लॉक के भैला मकदूमपुर निवासी बेबी नाज वर्ष 2006 से दोआबा विकास एवं उत्थान समिति और नारी मुक्ति मंच से जुड़ी हैं। वर्ष 2022 से बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और पॉश कमेटी की सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। उनका प्रयास महिलाओं और बालिकाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, अधिकारों के प्रति जागरूक करने और अपराध से बचाव के लिए प्रेरित करना है।
सुमन कुशवाहा, प्रधानाध्यापिका
सुमन कुशवाहा, प्रधानाध्यापिका
सुमन कुशवाहा, प्रधानाध्यापिका