जिला अस्पताल में महिला सर्जन होने के बावजूद ऑपरेशन नहीं किया जा रहा है। आपरेशन की स्थिति आने पर गर्भवती महिलाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
ऐसे में उनको मजबूरन निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। ऑपरेशन न होने से अब तक दो महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। तीमारदारों के विरोध और शिकायत के बाद भी अफसरों के कानों में जूं नहीं रेंग रही है। इससे तीमारदारों में गुस्सा है।
कौशाम्बी जिला बनने के बाद गरीबों को अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय का निर्माण कराया गया है। वर्ष 2009 में 9 करोड़ 45 लाख की लागत से बना जिला अस्पताल आज भी चिकित्सकों की तैनाती न होने का दंश झेल रहा है। अस्पताल में कुछ विशेषज्ञों की तैनाती तो है पर गरीबों का उपचार नहीं किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में तैनात महिला सर्जन द्वारा आपरेशन नहीं किया जाता है। प्रसूताओं को भर्ती करने के बाद उनको स्टाफ नर्स और दाई के भरोसे छोड़ दिया जाता है। ऑपरेशन की स्थिति आने पर भी महिला सर्जन ऑपरेशन नहीं करती हैं। इसके लिए उन्हें किसी निजी अस्पताल या फिर इलाहाबाद एसआरएन जाने की सलाह देकर अपना पल्लू झाड़ लेती हैं।
ऐसे में तीमारदार मजबूर होकर प्रसूताओं को निजी अस्पताल ले जाते हैं। तीमारदारों की शिकायत और विरोध के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। इसे लेकर लोगों में जबरदस्त गुस्सा है।