दोआबा के थाने और कोतवाली अर्से से महिला सिपाही विहीन चल रहे हैं। थानेदारों की मांग के बाद भी महिला सिपाहियों की तैनाती नहीं की जा रही है। ऐसे में अपराधिक मामलों में पकड़ी जाने वाली महिलाओं को महिला थाने में रखा जाता है। थानाें में महिला कांस्टेबल की जिम्मेदारी पुरुष आरक्षियों को निभानी पड़ रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जिले में एक दर्जन से कम महिला सिपाहियों की तैनाती है। जो महिला थाने, महिला प्रकोष्ठ और पुलिस कार्यालय में तैनात हैं।
दोआबा की 15 लाख आबादी की सुरक्षा के लिए 13 थाने संचालित किए जा रहे है। जिला बनने के बाद भी थाने और कोतवाली महिला कांस्टेबल विहीन चल रहे हैं। जिला मुख्यालय में एक दर्जन से कम महिला आरक्षियों की तैनाती है। जिन्हें पुलिस कार्यालय, महिला प्रकोष्ठ और महिला थाने में तैनात किया गया है। वहीं थानों में महिला सिपाहियों की तैनाती नहीं किए जाने से दबिश के साथ अपराधिक मामलों में संलिप्त महिलाओं को दबोचने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार तो ऐसा होता है कि दबिश के दौरान महिलाएं विरोध पर उतरती हैं तो पुलिस कर्मियों को कदम पीछे खीचने पड़ते हैं। थानेदारों की मांग के बाद भी थानों में महिला सिपाहियों की तैनाती नहीं की जा रही है। ऐसे में थाने के जिम्मेदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल कराने में होती है दिक्कत
दुराचार के मामलों में पीड़िता का मेडिकल कराने में थानेदारों को बहुत दिक्कत होती है। पीड़िता के थाने आने पर थानेदार महिला थाने से सिपाही की मांग करते हैं। महिला थाने में भी गिनी चुनी सिपाहियों की तैनाती होने से कई-कई दिनों तक पीड़िता का मेडिकल परीक्षण नहीं हो पाता है।