मंझनपुर। घरेलू कामकाज के साथ ही परिवार नियोजन का जिम्मा भी आधी आबादी के कंधों पर है। जनपद में वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक के आंकड़े देखें तो 14208 महिलाओं ने नसबंदी कराई है। इन चार सालों में पुरुषों के नसबंदी कराने का आंकड़ा महज 316 है। तमाम जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद भ्रांतियों की वजह से महिलाओं की तुलना में तीन प्रतिशत पुरुषों ने भी नसबंदी नहीं कराई।
महिलाओं को नसबंदी कराने के लिए चीरा लगवाना पड़ता है। इसके बाद आठ से दस दिन तक आराम करने की चिकित्सक सलाह देते हैं, जबकि पुरुषों की नसबंदी आसानी से हो जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से चीरे और टांके से मुक्त होती है। इससे किसी भी प्रकार की जटिलता का खतरा नहीं रहता है। नसबंदी के कुछ देर बाद ही व्यक्ति सामान्य रूप से अपना कामकाज कर सकता है।
पुरुष नसबंदी कराने वाले लाभार्थी को शासन की ओर से तीन हजार रुपये राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद पुरुष परिवार नियोजन के मामले में आगे नहीं आ रहे हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष के ही आंकड़े देखें तो अप्रैल से अब तक 34 पुरुषों ने नसबंदी कराई है। जबकि 985 महिलाएं नसबंदी करा चुकी हैं। पुरुषों के बीच भ्रांति है कि अगर वह नसबंदी कराएंगे तो शारीरिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। जबकि, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पुरुषों की नसबंदी तो बिना चीरा लगाए हो जाती है। नसबंदी के तुरंत बाद वह आम दिनों की तरह अपना कामकाज कर सकते हैं। हिंद प्रकाश मणि, डिप्टी सीएमओ