मुकद्दस रमजान का पांचवां रोजा सोमवार को पूरा हो गया। गुलाबी ठंड बड़ों से लेकर बच्चों के लिए रोजा रखने के लिए अनुकूल मौसम माना जा रहा है। यही कारण है कि नियमित दवा लेने वालों को छोड़ दें तो हर कोई रोजा रख रहा है। कई नन्हें मुन्ने पांच दिन से रोजा रह रहे है। हाफिज मुश्ताक अहमद बताया कि रमजान का पूरा महीना हर मुसलमान के लिए काफी अहम है। बड़ों के लिए इस्लाम में रोजा रखना अनिवार्य कहा गया है।
रोजा रखने से हमें दिली सुकून मिलता है। अल्लाह के हुक्म की अदायगी भी होती है। मेरे अब्बू ने मुझे रोजा रखने की इजाजत दी। मैंने पांच दिनों से अपना रोजा आसानी से पूरा किया। -सिद्दीका सरदार
अल्लाह ने हमें बेहतरीन मौका दिया है कि हम उसकी इबादत कर सकें। मेरे अब्बू-अम्मी ने यही बताया कि हर मुसलमान पर रोजा वाजिब है। रोजा रखने वालों की दुआ कबूल होती है। इसलिए रोजा रखना उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। -बाकिर अब्बास
रोजा रखने के साथ-साथ मैं इबादत भी कर रही हूं। इफ्तार में अम्मी मेरी पसंद के पकवान बनाती हैं, जिसका मुझे पूरे दिन बेसब्री से इंतजार रहता है। शाम को घर के बड़े लोग इनाम भी देते हैं, जिससे रोजा रखने की खुशी दोगुनी हो जाती है। -रिफत फात्मा
रिफत फातमा- फोटो : kathua news
रिफत फातमा- फोटो : kathua news