अब पानी लोगों के लिए परेशानी नहीं बल्कि कमाई का जरिया बनेगा। जिले में तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों में मखाने की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। जिले में जलभराव वाले क्षेत्र अब आय के स्रोत बनेंगे और यहां मखाने को उगाया जाएगा।
कौशाम्बी में कई क्षेत्रों में बारिश के बाद जलभराव और तालाबों में लंबे समय तक पानी भरा रहता है। ऐसे जलक्षेत्रों का उपयोग मखाने की खेती के लिए किया जा सकता है। कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इससे जलक्षेत्रों का सदुपयोग होगा और किसानों की आय बढ़ेगी।
जिला उद्यान अधिकारी अवधेश मिश्र ने बताया कि मखाने की मांग अधिक है। इसकी खेती से किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
ऐसे तैयार होगी मखाने की फसल
मखाने की खेती तालाब या 1-2 फीट पानी वाले खेत में होती है। दिसंबर-जनवरी में नर्सरी तैयार कर खेत में पानी भरकर पौधे रोपे जाते हैं। चौड़ी, कांटेदार पत्तियां पानी में तैरती रहती हैं। फसल में समय-समय खाद के साथ कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है।
मई-जून में बैंगनी फूल आने के बाद फल पानी के भीतर विकसित होते हैं और पककर तालाब की तली में बैठ जाते हैं। जुलाई-अगस्त में इन्हें हाथ या विशेष उपकरण से निकाला जाता है। बीजों को भूनकर और फोड़कर मखाने के दाने तैयार किए जाते हैं।