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गर्मी में पानी के लिए हाहाकार, सूखे तालाब

Fri, 01 Apr 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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तालाबों की खोदाई में खर्च हो चुकी लाखों की धनराशि
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दोआबा में गर्मी शुरू होते ही पानी को लेकर हाहाकार मचने लगा है। मानसूनी बारिश न होने के कारण अप्रैल के शुरू में ही तालाबों से धूल उड़ने लगी है। जबकि तालाबों की खोदाई में प्रशासन ने लाखों रुपया पानी की तरह बहा दिया पर पानी भरने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया। तालाबों में पानी न होने से पशुपालकों का बुरा हाल है। उन्हें मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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दोआबा में तेजी से घट रहे भूगर्भ जल स्तर के चलते पेयजल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इससे निजात पाने के लिए प्रशासन ने लाखों रुपए खर्च कर 451 तालाबों की खोदाई कराई। माना जा रहा था कि बरसात का पानी तालाबों में रुकेगा तो भूगर्भ जल स्तर में सुधार आएगा। लेकिन मानूसन के ऐन वक्त पर दगा दे जाने से खोदवाए गए तालाब पानी से लबालब नहीं हो सके। नतीजा यह रहा कि मार्च के अंत तक इन तालाबों में धूल उड़ने लगी। सूखे पड़े इन तालाबों को खोदवाने में मनरेगा का लाखों रुपया भले ही खर्च हो गया हो पर पानी भरवाने के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं खर्च की गई। तालाबों में पानी न होने की वजह से सबसे बुरा हाल पशुपालकों का है। मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए तालाबों में बूंद भर पानी नहीं है। ऐसे में जिले के पशुपालकों का हाल बेहाल है। यदि जल्द ही तालाबों में पानी भरवाने का ठोस उपाय नहीं किया गया तो मवेशियों की प्यास बुझाने में मुश्किल आएगी। ऐसे में अब गांव के लोग तालाबों में पानी भरवाए जाने के लिए प्रशासनिक अफसरों का मुंह ताक रहे हैं।


संकट में पड़ सकती है जंगली जीवों की जान
दोआबा के तालाबों में उड़ रही धूल जंगली जीवों की जान पर आफत बन सकती है। तालाबों में पानी न होने की वजह से जंगल में रहने वाले जानवर और पक्षी प्यास से दम तोड़ सकते हैं। इसके अलावा गर्मी से और प्यास से व्याकुल वन्य जीव सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा आदि पानी की तलाश में गांवों की ओर भी रुख कर सकते हैं। इससे जनहानि का खतरा हो सकता है।
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