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खेतों के नलकूप बने पेयजल का सहारा

Fri, 22 Apr 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गर्मी आते ही कौशाम्बी में सूखने लगा हैंडपंप, कुओं का पानी
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सिराथू-मंझनपुर मुख्यमार्ग पर जिला मुख्यालय से तीन मील दूर बसे करनपुर बाजार में तीन महीने से बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मचा है। सौ दुकानों और करीब 200 घरों की इस बस्ती में लगे 4 हैंडपंप मार्च महीने से खराब पड़े हैं। ट्रांसफार्मर भी फुंका हुआ है। इससे बाजार के लोगों को बाल्टीभर पानी के लिए 500 मीटर दूर खेत में लगे ट्यूूबवेल की ओर भागना पड़ता है। पानी की यह समस्या केवल यहीं की नहीं है। कौशाम्बी में मानसून के दौरान पड़े सूखे का असर गांव-गांव है। भू-जलस्तर नीचे भागने से ज्यादातर गांवों में 50 फीसदी हैंडपंप और कुओं का पानी सूख गया है। इससे गर्मी के इस जलते-तपते मौसम में गांव-गांव पानी की किल्लत से दोआबावासी जूझ रहे हैं।
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कौशाम्बी की आबादी करीब 17 लाख है। 498 गांवों में रहने वाले इन लोगों को पेयजल मुहैया कराने के लिए करीब 27 हजार हैंडपंप विभिन्न योजनाओं के तहत लगाए गए हैं। पर, मानसून में सूखा पड़ने और खराब होने वाले हैंडपंपों की मरम्मत और उन्हें ठीक नहीं कराने से 40 फीसदी हैंडपंपों का पानी सूख चुका है। खराब होने वाले हैंडपंपों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इससे गांव-गांव पानी की समस्या शुरू हो गई है। मंझनपुर जिला मुख्यालय से सटे भड़ेसर गांव में ही देखें तो हैंडपंपों के खराब होने से कई परिवार के लोग बस्ती से बाहर बने पंचायत भवन के हैंडपंप से साइकिल के सहारे बाल्टी और डिब्बों से पानी भरकर ढोने को मजबूर हैं। हैंडपंपों के खराब होने से पानी की ऐसी ही समस्या से करनपुर सौरई, शमसाबाद, राघवपुर, बिजलीपुर, मधवामई, मलाकपिंजरी समेत सिराथू के 50 से अधिक गांवों की बस्तीवाले भुगत रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति सिराथू-मंझनपुर मुख्यमार्ग पर स्थित करनपुर बाजार में है। जहां लगे चारों हैंडपंप खराब हैं। तीन महीने से ट्रांसफार्मर फुंका है। इससे घरों में लगे सबमर्सिबल पंप भी शोपीस बने हैं। ऐसे में बाजार के बासिंदे और दुकानदारों को पानी के लिए खेतों में लगे ट्यूबवेलों का सहारा है। नलकूपों से लोग सुबह-शाम पानी भरकर ले आने को विवश हैं।



बड़ी बाग: 100 घरों की बस्ती में सिर्फ एक हैंडपंप
 सिराथू ब्लॉक की ग्रामसभा दरियापुर मझियावां का मजरा है बड़ी बाग। सौ घरों की इस बस्ती में करीब 800 लोग रहते हैं। गांव के रहने वाले जावेद रिजवी, सिब्ते हैदर, असगर अब्बास, चांदबाबू, बनवारीलाल, मीना कुमारी, लक्ष्मी देवी, मंजू देवी, उमेश कुमार, फग्गूलाल, शारदा प्रसाद, सोनेलाल, रहबर आदि ने बताया कि उनके गांव में सिर्फ तीन हैंडपंप लगे हैं। इनमें दो हैंडपंप खराब पड़े हैं। सिर्फ एक हैंडपंप से पानी निकल रहा है। इसी हैंडपंप के सहारे आठ सौ लोग हैं। गांव के दो हैंडपंप खराब पड़े होने से लोगों को एक हैंडपंप पर लाइन लगाकर पानी भरना पड़ता है। सुबह-शाम तो हैंडपंप पर पानी भरने को लेकर अक्सर लोगों में कहासुनी होती रहती है। वहीं कई परिवार घर से दूर खेत में लगे नलकूप से पानी भरकर लाने को मजबूर हैं।
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दो हैंडपंप के भरोसे 4 हजार की आबादी
सिराथू तहसील के बिरौली गांव में पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं। चार हजार की आबादी वाले इस गांव में पेयजल मुहैया कराने को लगे 10 में से 8 हैंडपंप खराब पड़े हैं। इससे गांववालों को खेत में सिंचाई के लिए लगे सबमर्सिबल पंपों से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। देखें तो बिरौली गांव की आबादी करीब 4000 है। साथ ही यहां 10 हैंडपंप लगाए गए हैं। गांव के रहने वाले बच्चन सिंह, चंद्रशेखर चौरसिया, सुमन देवी, सुल्तान सिंह, अर्चना देवी, वरूण मिश्र, राधा देवी, माला देवी, माधुरी चौरसिया आदि ने बताया कि ज्यादार हैंडपंपों के खराब पड़े होने से पूरे गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। जिन दो हैंडपंपों से पानी निकल रहा है, उसमें दिनभर भीड़ लगी रहती है। कई घरों की दूरी तो इन हैंडपंपों से 500 से 800 मीटर पड़ती है। इतनी दूर जाकर लाइन लगाने के बाद लोगों को एक-दो बाल्टी पानी नसीब होता है।
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