सबमर्सेबल पंप के माध्यम से दिनभर ऐसी की जाती है पौधों की सिंचाई।
मानसून में सूखे के कारण गर्मी आते ही हैंडपंप, कुओं का पानी सूखने लगा है। भू-जलस्तर 2 मीटर तक नीचे चले जाने से हजारों हैंडपंप शोपीस बन गए हैं। इससे गंगा से लेकर यमुना कछार तक सौ से भी ज्यादा गांवों में पानी के लिए हाहाकार मचा है। हैंडपंपों के रिबोर, मरम्मत नहीं होने से जहां एक तरफ लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। वहीं जनपद मुख्यालय मंझनपुर समेत जिले के सभी कस्बों और साधन संपन्न घरों में अधाधुंध पानी की बर्बादी हो रही है। सबमर्सिबल पंप चलाकर छोड़ दिए जाने से छतों पर रखी टंकियां ओवरफ्लो होकर बहती रहती हैं। पाइप लाइन लीकेज, टोटियों के खराब होने से रोजाना हजारों लीटर पीने का पानी सड़क, नालियों में बहता रहता है।
कौशाम्बी में मानसून के दौरान जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने में महज 10 फीसदी बारिश हुई थी। तालाब, नहरें सूखी पड़ी हैं। इस सूखे का असर भूजलस्तर पर पड़ा है। जलस्तर दो मीटर से भी ज्यादा नीचे चले जाने से हैंडपंप, कुओं का पानी सूखने लगा है। जनपद में लगे करीब 40 फीसदी हैंडपंप पानी नहीं उगल रहे हैं। जलनिगम के आंकड़ों को देखें तो लगभग 6000 हैंडपंपों की सूची रिबोर के लिए पड़ी हैं। हैंडपंपों की मरम्मत, रिबोर नहीं किए जाने से मंझनपुर इलाके के बबुरा, अंबावा पूरब, बिछौरा, सेहिया, महुआखाड़ा, टेन शाहआलमाबाद, यमुना कछारी गांव जोगापुर, हिसामबाद, गढ़ी, कनैली, कपूरीपुर, फैजुल्लापुर, मवई, डेलईया, कैलाशपुर, धाना, ऐंगवा, सोनवारा, मुलायमपुर, भखंदा, दिया उपरहार समेत सौ से अधिक गांवों में पानी की किल्लत से बड़ी आबादी जूझ रही है। वहीं मंझनपुर मुख्यालय में ही देखें तो पाइप लाइन लीकेज होने, नल की टोटियों, पाइप टूटे होने से पीने का पानी सड़क और नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। इसी तरह से सरकारी कालोनियों में सप्लाई का पानी छत में रखी टंकियों में ओवरफ्लो होकर बहता रहता है। नल की टोटियों को बंद करने की किसी को फुर्सत नहीं है।