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डीहा गांव में बिजली-पानी के लिए हाहाकार

Tue, 17 May 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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 तहसील क्षेत्र के डीहा चायल गांव में दो महीने से बिजली पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ट्रांसफार्मर धड़ाम होने से डेढ़ हजार की आबादी उमसभरी गर्मी में तपने को मजबूर है। वहीं पेयजल के लिए बस्ती में लगे हैंडपंप भी एक-एक करके धड़ाम हो गए है। ऐसे में पीने के पानी को लेकर लोग परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद भी फुंके ट्रांसफार्मर और खराब पड़े हैंडपंपों को ठीक कराए जाने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। जिसे लेकर ग्रामीणों में बिजली और जल निगम विभाग के अफसरों के प्रति जबरदस्त आक्रोश है।
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चायल नगर पंचायत के वार्ड नंबर एक डीहा गांव की डेढ़ हजार की आबादी में बिजली पानी का हाहाकार मचा हुआ है। आपूर्ति के लिए बस्ती में लगा 63 केवीए का ट्रांसफार्मर दो महीने से फुंका पड़ा है। बस्ती के रहने वाले रामबाबू, जीत लाल, मन्नी लाल, प्रेम कुमार, अवधेश कुमार आदि लोगों का कहना है कि दो महीने पहले बिजली आपूर्ति के दौरान ट्रांसफार्मर अचानक धड़ाम हो गया। ट्रांसफार्मर फुंकने से गांव में बिजली-पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। वहीं गांव में पेयजल के लिए लगे आधा दर्जन हैंडपंपों ने भी एक-एक करके पानी उगलना बंद कर दिया है। 

ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद से कई बार उपकेंद्र जाकर बिजली विभाग के  कर्मियों से शिकायत की गई। इसके बाद भी फुंके ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। आपूर्ति ठप होने से गांव के लोग उमसभरी गर्मी की तपिश में दिन-रात तप रहे है। वहीं पेयजल के लिए भी निजी नलकूपों पर घंटों लाइन लगाकर खड़े होने को मजबूर है। बस्ती के लोगों ने चेताया कि यदि दो दिन के भीतर ट्रांसफार्मर बदला नहीं गया और खराब पड़े हैंडपंप ठीक नहीं कराए गए तो वह सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।
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 सराय अकिल उपकेंद्र के दर्जनभर गांवों की बिजली आपूर्ति 24 घंटे से ठप है। उपकेंद्र में तैनात संविदा कर्मियों के हड़ताल पर जाने से उत्पन्न हुई समस्या से फिलहाल निजात मिलती नहीं दिख रही है।, उधर बिजली नहीं मिलने से संबंधित गांवों के उपभोक्ता गर्मी से उबल रहे हैं।
सराय अकिल पावर हाउस में संविदा पर नौ कर्मियों की तैनाती है। इनमें अनीत मिश्र, राकेश मिश्र, भैरव प्रसाद, छवि नारायन तिवारी आदि प्रमुख हैं। इन कर्मियों का आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा 19 महीने से मानदेय नहीं दिया जा रहा है। मानदेय न मिलने को लेकर नाराज संविदा कर्मियों ने 15 से काम करना बंद कर दिया।

इसके चलते इलाके के सिहोरवा, सोंधिया, कोरांव खास, बिरनेर, सराय यूसुफ समेत दर्जनभर गांवों की आपूर्ति 24 घंटे से ठप है। बिजली नहीं मिलने से संबंधित गांवों के उपभोक्ता भीषण गर्मी में दिनरात उबल रहे हैं। मामले की शिकायत उपभोक्ताओं ने जेई सौरभ मौर्य से की तो उन्होंने हड़ताल की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया। उधर बिजली न मिलने से उपभोक्ताओं का हाल बेहाल है।

 भीषण तपिश और गर्मी के कहर से दोआबा के लोग उबल रहे हैं। इस हालत में लो-वोल्टेज और बिजली कटौती कोढ़ में खाज का काम कर रही है। कटौती से घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा मुख्यालय स्थित सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों का बुरा हाल है।

दोआबा के लोग इन दिनों भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से तप रहे हैं। भीषण गर्मी से घरों में लगे कूलर, पंखे, एसी से थोड़ी राहत मिल जाती है लेकिन बिजली का कटौती होने से घरों में रखे यह उपकरण शो-पीस बन जातेहैं। जिले भर के उपभोक्ता भीषण तपिश और गर्मी में लो-वोल्टेज का शिकार हैं। पहले तो गांवों को भरपूर बिजली नहीं मिलती। यदि कभी ठीक से आपूर्ति हुई भी तो वोल्टेज इतना लो रहता है कि उपकरण काम ही नहीं करते। बानगी के तौर पर सराय अकिल पावर हाउस के बसुहार, म्योहर, इछना, म्योहरिया, बेनीराम कटरा आदि गांवों को लिया जा सकता है।

सबसे बुरा हाल तो मुख्यालय मंझनपुर का है। गर्मी की शुरुआत होते ही यहां बिजली की अघोषित कटौती जोर पकड़ चुकी है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों का बुरा हाल है। बिजली के अभाव में मरीजों के परिजनों को खड़े रहकर घंटो हाथ से पंखा करना पड़ता है। भीषण गर्मी में बिजली के इस खेल से उपभोक्ताओं, मरीजों के परिजनों और सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों में उबाल है।
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