गोपसहसा और करारी उपकेंद्र के आधा दर्जन गांवों की बत्ती गुल चल रही है। ट्रांसफार्मर फुंकने से कहीं साल भर से तो कहीं दो माह से अंधेरा है। बिजली के अभाव में रह रहे उपभोक्ताओं ने संबंधित जेई से कई बार शिकायत की। इसके बावजूद फुंका ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा सका। ऐसे में शासन द्वारा 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा उपभोक्ताओं के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
विकास खंड कौशाम्बी के गांवों को गोपसहसा और करारी विद्युत उपकेंद्र से आपूर्ति दी जाती हैं। दोनों उपकेंद्रों के आधा दर्जन गांवों के सात ट्रांसफार्मर फुंके हुए हैं। इनमें करारी उपकेंद्र के कपरवारा गांव में लगे दस केवीए के दो ट्रांसफार्मर एक साल से फुंके हैं। इसी तरह मढ़ी, मुस्तफाबाद, आंबाकुआं, गुरौली, कनैली आदि गांवों के ट्रांसफार्मर फुंकने से उपभोक्ताओं को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती है।
मुस्तफाबाद निवासी मोतीलाल कुशवाहा, आंबाकुआं के तीरथलाल, कनैली के मनोज सिंह, गुरौली के अशोक मिश्र, मढ़ी ग्राम प्रधान अशोक मिश्र और कपरवारा के उपभोक्ता छोटेलाल का आरोप है कि ट्रांसफार्मर बदले जाने के लिए संबंधित जेई से कई बार मुलाकात की गई। उन्होंने आश्वासन तो दिया पर आज तक ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा सका। इसके चलते ग्रामीण उपभोक्ता अंधेरे में रात बिताने के लिए मजबूर हैं। ट्रांसफार्मर न बदले जाने से उपभोक्ताओं में महकमे के जिम्मेदार के प्रति खासी नाराजगी है। कुछ भी हो इन गांवों का ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद सूबे की सरकार द्वारा 72 घंटे में बदलने का किया जा रहा दावा हवा हवाई साबित हो रहा है।
किस गांव कितने केवीए का फुंका है ट्रांसफार्मर
गांव का नाम ट्रांसफार्मर दिन
कपरवारा 10 केवीए एक साल
मढ़ी 25 केवीए दो माह
गुरौली 10 केवीए तीन माह
कनैली 100 केवीए एक माह
मुस्तफाबाद 15 केवीए 15 दिन
आंबाकुआं 100केवीए 15 दिन
ट्रांसफार्मर फुंकने की जानकारी नहीं है। साल और महीने भर से फुंके ट्रांसफार्मर क्यों नहीं बदले गए इसकी जांच कराई जाएगी। मामले में लापरवाही उजागर होने पर संबंधित जेई के खिलाफ कार्रवाई होगी।
प्रभाकर पांडेय, एक्सईएन विद्युत