दलित बाहुल्य जिले कौशाम्बी में शनिवार को सीएम अखिलेश यादव के मंच को सजाने में चुनावी समीकरण का पूरा ख्याल रखा गया। मंच पर नेताओं का जमघट रहा। मगर बोलने का मौका उन्हें ही मिला, जो चुनावी समीकरण के लिहाज से फिट बैठे। इन नेताओं ने सीएम से जिले की तीनों सीटों को जीतकर देने का वादा किया। सपा की इस सियासी सूझबूझ की जमकर चर्चा रही।
कौशाम्बी में बसपा ने मुस्लिम कार्ड खेलकर सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। ऐसे में बसपा की काट का इंतजाम सीएम के मंच पर किया गया। सभा की औपचारिक शुरुआत होते ही सबसे पहले पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार को मौका मिला। शैलेंद्र ने जिले के हालात एक-एक कर बयां किए। सारी दिक्कतें गिनाईं। लोगों को अहसास कराया कि सीएम ने समस्याएं सुन ली हैं और उसका जल्द ही निदान होगा। इसके बाद पूर्व सांसद अतीक अहमद को संबोधन के लिए बुलाया गया। अतीक ने बगैर लाग लपेट के ही अल्पसंख्यकों के बीच चर्चा में रहने वाले राम मंदिर मुद्दे पर बोलना शुरू कर दिया। विरोधियों पर तंज कसते हुए अतीक ने कहा कि जो मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नहीं हुए वे किसके हो सकते हैं।
अतीक को तव्वजो मिलने से जाहिर हो गया कि सपा अल्पसंख्यकों को उनके सहारे साधने की कोशिश जिले में करेगी। इसके बाद गाजीपुर की सैदपुर सीट से विधायक सुभाष पासी का नंबर आया। विधायक ने सीएम अखिलेश की शान में जमकर कसीदे पढ़े और स्वजातीय लोगों का हित सपा में बताने में कोई कोरकसर नहीं रखी। विधायक होने के नाते वाचस्पति को भी मौका मिला। विधायक ने जनसमस्याओं को रखकर लोगों की नब्ज पकड़ने की कोशिश की तो सीएम ने भी मांगों को पूरा करने का पूरा आश्वासन दिया। इसके बाद एमएलसी वासुदेव यादव ने सपा सरकार में जनहित में किए गए कार्यों का विवरण दिया। कुल मिलाकर सपा ने इन पांचों नेताओं के जरिए यादव, अल्पसंख्यक और दलित वोटों को साधने का बखूबी प्रयास किया। शायद इसी का नतीजा है कि सभा में करीब 15 हजार की भीड़ रही।