महेवाघाट थाना क्षेत्र में 21 वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश सरीन जैदी ने दोष सिद्ध होने पर दो दोषियों को आजीवन कठोर कारावास और 31-31 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक दोषी की मृत्यु हो चुकी है।
महेवाघाट थाना क्षेत्र के सरसवां गांव के मजरा लोधन का पूरा में छह फरवरी 2004 को रंजिश के चलते दो पक्षों में विवाद हुआ था। इस दौरान एक पक्ष ने फायरिंग कर दी। फायरिंग में भुइरा उर्फ भइया की मौके पर मौत हो गई, जबकि वीरेंद्र पाल गंभीर रूप से घायल हो गया था।
घटना के बाद भानु लोध की तहरीर पर पुलिस ने हंसराज लोध, छितानी और राम भरोस लोध के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता ने मुकदमे में कुल 11 गवाहों को पेश किया।
सुनवाई के दौरान राम भरोस लोध की मृत्यु हो गई। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने मंगलवार को हंसराज लोध व छितानी को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने हत्या के दोषी दोनों को आजीवन कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना, हत्या के प्रयास में 10-10 वर्ष की सजा व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया।
साथ ही अवैध शस्त्र रखने पर दो-दो वर्ष की सजा व एक-एक हजार रुपये जुर्माना लगाया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माना अदा न करने पर दोनों को तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।