पहाड़ों पर भारी बारिश का असर जिले में भी दिखने लगा है। जनपद में गंगा-यमुना का जल स्तर बढ़ने लगा है। इसे लेकर तराई में बसे लोग चिंतित हैं। हालांकि, प्रशासन संभावित बाढ़ से निपटने की सभी तैयारियां पूरी करने का दावा कर रहा है।
कौशाम्बी में भले ही बिन बारिश लोग व्याकुल हों, लेकिन पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश का असर यहां दिखने लगा है। क्योंकि, रोजाना वहां से गंगा-यमुना में पानी छोड़ा जाने लगा है। इसके चलते जिले में नदियों का जल स्तर बढ़ने लगा है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन जगदीश लाल ने बताया कि नरौरा स्थित चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज से शुक्रवार को भी एक लाख 70 हजार 904 क्यूसेक पानी गंगा में पानी छोड़ा गया है। हालांकि, इसका असर अगले 48 घंटे बाद जिले में दिखेगा। शुक्रवार को कुबरी घाट पर गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ता दिखा। इसके चलते पुरोहितों ने घाट किनारे से तखत हटा लीं। पुरोहित प्रमोद पांडेय ने बताया कि शाम तक लगभग 7-8 फिट पानी बढ़ा हुआ है। खतरे को देख हम लोग सामान सुरक्षित जगह पर रख रहे हैं।
गंगा-यमुना खतरे के निशान से क्रमश: 7 व 10 मीटर नीचे बह रही हैं। सिंचाई विभाग के अफसरों को नदियों के बढ़ते जलस्तर पर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। आपदा विशेषज्ञ की टीम को सक्रिय कर तहसीलवार चायल में 39, मंझनपुर में 134 एवं सिराथू में 80 नाव की उपलब्धता कराई गई है। 253 नाविक एवं 16 गोताखोर चिह्नित कर उन्हें हर समय तैयार रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।
-जयचंद्र पांडेय-एडीएम वित्त एवं राजस्व