पिपरी थाना क्षेत्र से जुड़े करीब 12 साल पुराने नाबालिग अपहरण मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है।
वर्ष 2014 में पिपरी थाना क्षेत्र निवासी राज बहादुर ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि बेटी का अपहरण कर उसे बेच दिया गया है। पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के बाद पुलिस ने विरेंद्र उर्फ कटारी और छोटन को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामला विशेष न्यायालय में विचाराधीन रहा और लंबे समय तक सुनवाई चलती रही।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों की कमजोरी को अदालत के समक्ष रखा। वहीं अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ सिद्ध नहीं कर सका।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अशोक श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके।