इसके बाद किशोरी के पिता ने गर्भपात कराने के लिए कोर्ट ने प्रार्थना पत्र दिया। 16 दिन पहले कोर्ट ने सीएमओ को आदेश दिया कि मेडिकल बोर्ड गठित कर किशोरी का गर्भपात कराया जाए। किशोरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब तक उसका गर्भपात नहीं हो सका है। सीएमओ डॉ. सुष्पेंद्र का कहना है मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट अदालत को भेज दी है। अब अदालत के अग्रिम आदेश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने रिपोर्ट के बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि 27 माह का गर्भ होने के कारण डॉक्टर गर्भपात करने के पक्ष में नहीं हैं। डॉक्टरों का मानना है कि इससे किशोरी और उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत हो सकती है।
साहब ! बिन ब्याही बेटी है, क्या करेंगे बच्चा
दुष्कर्म पीड़िता के पिता का कहना है अगर बच्चा पैदा हो गया तो बेटी से शादी कौन करेगा। इसीलिए उसने कोर्ट में अर्जी देकर गर्भपात कराने की अनुमति मांगी थी। 16 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक बेटी का गर्भपात नहीं कराया गया। जिला अस्पताल में भी बेटी का कोई इलाज नहीं हो रहा। कुछ पूछने पर चिकित्सक झिड़ककर भगा देते हैं। आखिर हम लोग क्या करें ? कुछ समझ में नहीं आ रहा। उधर, घटना की शिकार किशोरी भी बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। पिता के मुताबिक, अक्सर वह जान देने की जिद करती रहती है।
दुष्कर्म पीड़िता को करीब 27 सप्ताह का गर्भ है। जिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. तौहीदा व डॉ. रेखा यादव उसका इलाज कर रही हैं। जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। गर्भपात को लेकर सीएमओ की तरफ से कोर्ट में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट भेज दी गई है। आगे जो भी फैसला होगा, उस हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस स्थित में गर्भपात कराना मुश्किल भरा हो सकता है। - डॉ. दीपक सेठ, सीएमएस