दहेज हत्या के एक मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय-1 फरीदा बेगम ने बृहस्पतिवार को तीन अभियुक्तों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला थाना सरायअकिल क्षेत्र के तिल्हापुर गांव का है। दोषियों ने एक विवाहिता को दहेज के लिए जिंदा जला दिया। साथ ही उसके दो मासूम बच्चों को बक्से मकें बंदकर फुंका था।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि घटना 16 अप्रैल 2018 की है। पीड़िता की मां छुनिकी देवी निवासी बरई बंधवा ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि ससुरालीजन बेटी अमरअती को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने बेटी जिंदा जला दिया और उसकी मासूम बेटी नैना डेढ़ साल व सुनैना तीन साल को बक्से में बंद फूंक दिया। मुकदमा दर्ज कर सरायअकिल ने प्रकरण की विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने करीब सात साल चली सुनवाई के दौरान घटना में अमरअती के पति राजू, ससुर बुधई व भाभी लक्ष्मी देवी को दहेज और हत्या का दोषी करार दिया। तीनों को 10-10 साल का सश्रम कारावास और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
राजू
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