मार्च से जुलाई तक कई भीषण सड़क हादसों में 18 से अधिक लोगों की मौत, तेज रफ्तार और लापरवाही बनी बड़ी वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। जिले में पिछले तीन महीनों के दौरान हाईवे और प्रमुख सड़कों पर हुए लगातार भीषण हादसों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डोरमा के दर्दनाक हादसे के बाद भी दुर्घटनाओं का सिलसिला नहीं थम रहा। बीते मंगलवार रात एक बार फिर सैनी हाईवे पर अज्ञात ट्रक ने चार लोगों को कुचलते हुए फरार हो गया। इस घटना ने एक बार फिर डोरमा सड़क हादसे को ताजा कर दिया है।
डोरमा हादसा सबसे भयावह
27 मार्च को सैनी क्षेत्र के डोरमा पेट्रोल पंप के पास मुंडन संस्कार से लौट रही पिकअप आगे चल रहे डंपर से टकरा गई थी। हादसे में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि 20 लोग घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में चालक को झपकी आने की आशंका जताई गई थी।
महेवाघाट हाईवे पर लगातार हादसे
22 जून को सरसवां पीएचसी के सामने एंबुलेंस और कार की टक्कर में प्रतापगढ़ की शिक्षिका शाइमा फारूकी और उनके सात माह के मासूम बेटे की मौत हो गई, जबकि उनके पति और बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके आठ दिन बाद 30 जून को हिनौता गांव के सामने डंपर और कार की भिड़ंत में निजी चिकित्सक डॉ. अनिल सिंह की जान चली गई।
पीआरडी जवान और युवकों की भी गई जान
एक जुलाई को सैनी चौराहे पर ड्यूटी कर रहे पीआरडी जवान महताब अली को तेज रफ्तार लोडर ने कुचल दिया। वहीं 20 जून को पहाड़पुर कोदन गांव के पास कंटेनर और बाइक की भिड़ंत में इंटरव्यू देने जा रहे विवेक द्विवेदी और रमेश निषाद की मौत हो गई।
लगातार हो रहे इन हादसों ने हाईवे पर तेज रफ्तार, भारी वाहनों की लापरवाही, यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग दुर्घटना संभावित स्थलों पर प्रभावी निगरानी, गति नियंत्रण और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।