कोखराज में मनीष जायसवाल के घर में लूटपाट के दौरान दहशत के करीब 30 मिनट के बारे में बताते हुए भुक्तभोगी की आवाज गले में अटक रही थी। मनीष और पूजा की आंखों में खौफ साफ नजर आ रहा था। उन्होंने कहा, बेटे उत्कर्ष की जान दांव पर लगी थी, इसलिए उनकी मार खा रहे थे। एक बदमाश बेटे की गर्दन पर हंसिया रखे था। दो उन्हें और पूजा को बारी-बारी से पीट रहे थे। बदमाशों के दो अन्य साथी लूटपाट कर सामान समेटने में लगे थे।
मनीष ने पुलिस से बताया कि रात करीब पांचों बदमाश उनके घर में कब घुस आए, पता ही नहीं चला। आहट होने पर मनीष की नींद खुली तो तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। एक ने कनपटी पर तमंचा सटाया तो दूसरे ने सीने पर चाकू रख दिया।
मनीष कुछ समझ नहीं पाए तो जोर-जोर से चिल्लाने लगे। इस पर तीसरे बदमाश ने उन्हें एक के बाद एक कई थप्पड़ मारे। पति ने बचाव में फिर शोर मचाया तो नींद से जागी पत्नी पूजा बदमाशों का विरोध करने लगे। इससे नाराज बदमाश उन्हें लात-घूंसों से पीटने लगे। साथ ही डंडे से सिर पर वार कर दिया।
मनीष ने बताया कि उन्हें पिटता देख पत्नी पूजा एक बदमाश से हाथापाई करने लगी। जबकि दूसरे बदमाश ने उसका मुंह दबा रखा था। पति-पत्नी जब बदमाशों पर भारी पड़ने लगे तो एक लुटेरे ने रो रहे उत्कर्ष की गर्दन पर हंसिया रख दिया।
मनीष और पूजा ने बताया कि उन्हें काबू में करने के लिए बदमाशों ने धमकी दी कि चुप हो जाओ, नहीं तो वे बेटे की गर्दन अलग कर उसे मौत के घाट उतार देंगे। बदमाशों की बातें सुनकर उत्कर्ष भी सहम गया था। इस बीच बदमाशों ने दंपती को अलग कमरे में बंद कर दिया और कहा कि शोर मचाया तो बाहर खड़े बेटे मार डालेंगे।
करीब तीस मिनट तक लूटपाट के बाद बदमाश चले गए। तब उत्कर्ष ने दरवाजा खोलकर माता-पिता को बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस को सिलसिलेवार घटनाक्रम की जानकारी दी।
मम्मी को सिर में डंडे और पापा को थप्पड़ मारे थे...
लूटपाट की सूचना पर पहुंची पुलिस को भुक्तभोगी दंपती के आठ वर्षीय बेटे उत्कर्ष घटना के बारे में जानकारी दी। कहां पुलिस अंकल मेरे घर में बदमाश आए थे। उन्होंने मम्मी के सिर में डंडे मारे थे। रोकने पर पापा को कई थप्पड़ मारे थे। जब मैं रोने लगा तो मेरे गले पर हंसिया रख डांटते हुए कहा था कि चुप रहो, नहीं तो काट देंगे। इसके बाद मेरे मम्मी-पापा को दूसरे कमरे में बंद कर दिया था। बदमाशों के जाने के बाद मेरे पेट में दर्द होने लगा था। मम्मी ने तेल लगाकर सहलाया, तब आराम मिला। इतना कहते हुए उत्कर्ष के आंखों से आंसू छलक आए। पूजा ने बेटे को चुप कराया।