तथागत की तपस्थली से मंझनपुर मुख्यालय तक सीधी बस सेवा नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस 32 किलोमीटर की यात्रा के लिए यात्रियों को बार- बार ई-रिक्शा बदलना पड़ता है। इससे समय और पैसा दोनों बर्बाद रहे हैं।
कौशाम्बी बौद्ध और जैन धर्म का प्रमुख आस्था केंद्र है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग भी प्रशासनिक कार्यों के लिए मंझनपुर आते-जाते हैं लेकिन इस मार्ग पर न रोडवेज बस चलती है और निजी बस का मिलना भी मुश्किल है।
यात्रियों को पहले कौशाम्बी से बैंगवा, फिर बैंगवा से करारी और उसके बाद करारी से मंझनपुर तक अलग-अलग ई-रिक्शा से सफर करना पड़ता है। इस दौरान अतिरिक्त किराया देने के साथ असुविधा और जोखिम का भी सामना करना पड़ता है।
मंझनपुर जाने के लिए पूरे दिन ई-रिक्शा बदलना पड़ता है। सीधा साधन नहीं होने से मनमाना किराया देना पड़ता है। समय भी अधिक लगता है और सफर सुरक्षित नहीं रहता।
रोहित यादव, गढ़वा
कौशाम्बी ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां रोज हजारों श्रद्धालु आते हैं फिर भी परिवहन सुविधा नहीं है। सरकार को इस मार्ग पर नियमित बस सेवा शुरू करनी चाहिए।
अंकित त्रिपाठी, अधिवक्ता
कौशाम्बी से मंझनपुर मार्ग पर यात्रियों की संख्या और संचालन की व्यवहारिकता का आकलन किया जा रहा है। पर्याप्त सवारी मिलने की स्थिति में बस सेवा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
गंगा शंकर शर्मा, डिपो इंचार्ज, मंझनपुर