जिले में झोलाछाप की ओर से हर गली, हर मोहल्ले और लगभग हर चौराहों पर क्लीनिकों का संचालन हो रहा है। झोलाछाप की दवाएं मरीजों की जान पर बनती जा रही हैं लेकिन विभाग शांत बैठा है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार कुल 130 पंजीकृत अस्पताल हैं।
नोडल डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार मौर्य के अनुसार जनपद में करीब 130 अस्पताल पंजीकृत हैं। वहीं, विभिन्न कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप ने जगह-जगह अवैध क्लीनिक खोल रखे हैं जिनके बारे में विभाग आंख बंद किए बैठा है। शुक्रवार को चायल के कसेंदा निवासी मल्हू की एक वर्षीय बेटी की झोलाछाप के द्वारा दी गई दवा से हालत बिगड़ गई और कुछ देर में ही मासूम की मौत हो गई।
इन क्लीनिकों में न तो जरूरी संसाधन हैं और न ही प्रशिक्षित डॉक्टर, फिर भी मरीजों का इलाज खुलेआम किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन झोलाछापों की लापरवाही से आए दिन मासूम लोगों की जान जा रही है, लेकिन इसके बावजूद इनपर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
इन झोलाछाप डॉक्टरों के सस्ते इलाज के झांसे में आकर गरीब और ग्रामीण मरीज इन अवैध क्लीनिकों का रुख करते हैं, जहां गलत इलाज और दवाओं के चलते उनकी हालत और बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग के सामने अब इन अवैध अस्पतालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करना बड़ी चुनौती बन गई है।