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Kaushambi News: खोजवापुर गांव के युवाओं ने अंग्रेजों की नाक में कर दिया था दम

Tue, 12 Aug 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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मंझनपुर ब्लॉक परिसर का शहीद स्मारक। संवाद
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मंझनपुर ब्लॉक के खोजवापुर गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस गांव के चार स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश सरकार की नाक में दम कर दिया था। ननकू सिंह को कादीपुर स्थित ससुर खदेरी नदी पर बने पुल को उड़ाने की योजना बनाते गिरफ्तार कर लिया। इनको सजा देते हुए कोड़े बरसाए गए और छह महीने के लिए कारावास दी गई।
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सदर ब्लॉक का खोजवापुर ऊर्फ मिर्जापुर जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर ससुर खदेरी नदी के किनारे बसा है। इस गांव के ननकू सिंह पुत्र श्री नारायण मात्र 18 साल की उम्र में ही देश को आजाद कराने के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मैदान में कूद पड़े थे। उनके साथ गांव के द्वारिका प्रसाद, राजाराम सिंह और शिवशंकर सिंह भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने लगे।
ससुर खदेरी नदी पुल को बम से उड़ाने की योजना बनाते समय ननकू सिंह पकड़े गए। 28 जनवरी 1932 को इन्हें छह महीने के लिए नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया। राजाराम सिंह ने देश की खातिर आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प ले लिया।
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राजाराम सिंह के भाई के पोते विनोद सिंह ने बताया कि यहां के स्वतंत्रता सेनानियों ने 1920-21 में गांधीजी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उन्होंने सरकारी स्कूलों, अदालतों और नौकरियों का बहिष्कार किया और विदेशी वस्तुओं का विरोध किया। 1930-31 में गांधीजी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन व नमक सत्याग्रह में भाग लेकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भी इस गांव के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संघर्ष किया। देश की आजादी के बाद इस गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया गया। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सरकार ने पहचान दी। इनके नाम का स्मारक आज भी ब्लॉक परिसर में लगा है। संवाद
खोजवापुर गांव के स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह गांव भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है लेकिन दुख इस बात का है कि उनके नाम से आज तक यहां एक भी काम नहीं हुआ। यहां तक कि गांव में किसी का स्मारक भी नहीं बना। ससुर खदेरी नदी किनारे बसे इस गांव में पिछड़ी जाति की आबादी ज्यादा है। बजट नहीं आने से विकास के कई काम नहीं हो पा रहे हैं। - सरिता देवी, प्रधान खोजवापुर ऊर्फ मिर्जापुर
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