मंझनपुर। कड़ाके की ठंड, शीतलहर, बूंदाबांदी और फिर चटकती धूप...मौसम का यह उतार-चढ़ाव लोगों को बीमार बना रहा है। लोग सर्दी-जुकाम, बुखार, सांस की बीमारियों और जोड़ों के दर्द से जकड़े हुए हैं। बुधवार को ही जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 300 लोग दवा लेने आए थे। इनमें 200 से भी ज्यादा लोग ऐसी ही मौसमी बीमारी से जकड़े थे। ठंड में सबसे ज्यादा दिक्कत दमा रोगियों को झेलनी पड़ रही है। डॉक्टर भी बताते हैं कि उतार-चढ़ाव से भरे मौसम में जरा सी चूक लोगों को अस्पताल पहुंचा सकती है।
द्वाबा में महीने भर से मौसम का मिजाज अजीब सा बना है। भीषण शीतलहर और गलन के बीच कभी फुहारें पड़ने लगती हैं, तो कभी दिन में तेज धूप चटकती है। इसी तरह से तापमान में भी जबरदस्त उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मंगलवार को ही रात में जहां पारा 10 के आसपास रहा। वहीं हल्की धूप निकलने से ही बुधवार को दिन में तापमान 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। वहीं तीन दिन तक तेज हवाओं के साथ बारिश भी हुई। इतना ही नहीं आसमान में अब भी बादलों की मौजूदगी है। इधर, दिन में मौसम का मिजाज जहां गर्म बना हुआ है। वहीं शाम होते ही अचानक पारा गिर जाता है। रात-दिन के तापमान में आ रहे बदलाव के बीच तनिक भी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बनी हुई है।
लोग बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी से पीड़ित हैं। वहीं जोड़ों का दर्द और सांस लेने में तकलीफ से भी लोगों को जूझना पड़ रहा है। बुधवार को ही जिला अस्पताल की ओपीडी में आए 300 लोग आए थे। इनमें पूजा देवी (25) निवासी अंदावा, मोहम्मद इसरार हुसैन (55) निवासी सरैंया, सीमा देवी (28) निवासी भरवारी, बहोरीलाल (45) निवासी मलाका, आलिम अहमद (15) निवासी सरैंया, शोभा देवी (48) निवासी पासिनहार, सुग्गीदेवी (40) निवासी थाम्बा, बच्चालाल (40) निवासी गंभीरा, राम अवतार निवासी भवनसुरी, मुख्तार अहमद (60) निवासी करारी, लवकुश कुमार (30) निवासी मलाक रेजमा, अमीन अहमद (50) निवासी सेवर आदि करीब 200 लोग सर्दी-जुकाम, बुखार से पीड़ित थे। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ एके कनौजिया का कहना है कि बारिश से बढ़ी आर्द्रता और खेतों में सरसों के फूलों के परागकण भी हवा के साथ उड़कर लोगों को सांस की बीमारी दे रहे हैं। सलाह दी कि लोग खुद को सुबह-शाम की ठंड से बचकर रखें। थोड़ी सी लापरवाही उन्हें अस्पताल पहुंचा सकती है।