इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के डीबीएफ से लेन-देन करते बुजुर्ग। संवाद
तकनीकी के युग में भी ग्रामीण इलाकों में डाकिया बाबू का भरोसा कायम है। व्हाट्सएप और स्मार्टफोन के दौर में भले ही निजी चिट्ठियों का चलन कम हो गया हो लेकिन सरकारी संदेश, पेंशन और त्योहारों पर राखी पहुंचाने में डाक विभाग की भूमिका आज भी अहम है। जिले के डाक विभाग ने पारंपरिक सेवाओं के साथ डिजिटल सुविधाओं का भी विस्तार किया है।
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से डाकिया अब चलता-फिरता डिजिटल बैंक बन गया है। बैंक जाने में असमर्थ बुजुर्गों, दिव्यांगों और ग्रामीणों को घर बैठे बैंकिंग सेवाएं मिल रही हैं। डाकिया बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिये पात्र लाभार्थियों को पेंशन और सरकारी योजनाओं की राशि निकालने में मदद करते हैं। इससे लोगों को बैंक की लंबी कतारों और आने-जाने की परेशानी से राहत मिलती है। जिले की तीनों तहसील सिराथू, मंझनपुर और चायल में करीब 111 से अधिक शाखा डाकघर और भरवारी व पश्चिम शरीरा जैसे कई उप-डाकघर साल के 365 दिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं।
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ग्रामीणों के लिए मददगार बनी सेवा
मंझनपुर उप डाकघर की बीपीएम जूली कुमारी और आर्यन सिंह यादव ने बताया कि बंधवा रजवर की दिव्यांग राम जलानी और भेलखा के दिव्यांग कल्लू जैसे कई लाभार्थी घर पर बैंकिंग सुविधा पाकर खुश हैं। डाकिया अब सिर्फ चिट्ठियां बांटने तक सीमित नहीं हैं बल्कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मददगार बन रहे हैं। बदलते समय के साथ डाक विभाग ने अपनी सेवाओं का स्वरूप बदला है लेकिन लोगों से जुड़ाव और भरोसे की परंपरा आज भी कायम है।
-वर्जन
बचपन में पिता की चिट्ठियां पढ़कर सुनाता था। इससे जुड़ी यादें आज भी भावुक कर देती हैं। - रामसूरत तिवारी, किसान, इब्राहिमपुर
एक समय परिवार के लोग डाकिए का इंतजार करते थे। आज फोन की सुविधा है, लेकिन त्योहारों पर राखी और अन्य संदेश पहुंचाने में डाक विभाग की भूमिका बनी हुई है। मनोज सिंह, सेवानिवृत्त फौजी, सरसवां
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के डीबीएफ से लेन-देन करते बुजुर्ग। संवाद