डोरमा के पास शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी। हाईवे पर त्वरित उपचार के लिए नरसिंहपुर कछुआ में 2.5 करोड़ की लागत से बनाए गए ट्रामा सेंटर की व्यवस्थाएं हादसे के दिन पूरी तरह निष्क्रिय रही। एक भी घायलों का वहां इलाज नहीं हो सका।
ट्रामा सेंटर में अधीक्षक डॉ. असलम समेत सीमित डॉक्टरों की तैनाती है, जबकि यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट और सर्जन सहित कम से कम आठ चिकित्सक होने चाहिए। वहीं, स्टाफ के रूप में एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन, छह स्टाफ नर्स और पांच मल्टी टास्क वर्कर ही कार्यरत हैं।
सबसे गंभीर स्थिति संसाधनों की है। ट्रामा सेंटर में एक्स-रे मशीन, ऑक्सीजन सप्लाई, जनरेटर और ऑपरेशन थिएटर के जरूरी उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। प्लास्टर के लिए पीओपी और आवश्यक दवाओं की भी कमी बनी हुई है।
कर्मचारियों ने बताया कि जनरेटर न होने से बिजली जाने पर पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। ओपीडी में रोजाना 10 से 15 मरीज पहुंचते हैं, लेकिन एक्स-रे के लिए उन्हें करीब पांच किलोमीटर दूर सिराथू सीएचसी भेजा जाता है।
ट्रामा सेंटर में सर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन और एनेस्थेटिस्ट सहित डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है। हादसे की सूचना मिलते ही सभी विशेषज्ञों को सिराथू सीएचसी में ही बुला लिया गया था, क्योंकि यह स्थान घटना स्थल के अधिक नजदीक है और लोगों के लिए भी सुविधाजनक है। - डॉ. संजय कुमार, सीएमओ
नरसिंहपुर कछुआ स्थित ट्रामा सेंटर पर खाली कुर्सी। संवाद