दो दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से लोग दहशत में आ गए। मंगलवार तो तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 6.5 डिग्री ज्यादा रहा। रात में कहर बरपा। तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री ऊपर 31.2 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार दो दिनों तक तापमान इसी तरह रहेगा। गर्म हवा चलेगी।
मंगलवार को सुबह सात बजे से ही धूप त्वचा झुलसाने लगी थी। लोगों के मुंह से यही निकलता रहा कि ऐसी गर्मी कब पड़ी उन्हें याद नहीं। दोपहर तीन बजे तक भी पारा 44 डिग्री सेल्सियस पर अटका रहा। गर्म हवा के झोंकों ने राहगीरों को बेहाल कर दिया। मेडिकल कॉलेज, विकास भवन और कलक्ट्रेट कम ही लोग आए। मंझनपुर, सरायअकिल, भरवारी, सिराथू समेत जिले की लगभर हर बाजार में सुबह 11 बजे से लेकर शाम पांच बजे तक सन्नाटा रहा।
प्रकृति से खिलवाड़ पड़ रहा भारी
कड़ा के विनय पांडेय ने कहा कि मौसम की यह तल्खी प्रकृति से खिलवाड़ व वनों के विनाश का परिणाम है। वनों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता तो यह स्थिति न होती।कल्यानपुर के रहने वाले हरिश्चंद्र ने बताया कि जरूरी काम से मंझनपुर आना था। सुबह सात बजे ही घर से निकल लिया था। फिर भी धूप पैरों को झुलसाती रही। हर एक या दो किमी के सफर के बाद छांव में रुकना पड़ा। भरी दोपहर दवा लेने मंझनपुर आए तन्नापर के 58 वर्षीय सलमान हैदर ने कहा कि बहुत पीछे की बात तो ध्यान नहीं, लेकिन बीते पांच सालों में ऐसी गर्मी नहीं पड़ी।
रोज भर्ती हो रहे चार-पांच बच्चे
मंझनपुर। भीषण गर्मी का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में रोजाना चार से छह मासूम डायरिया व बुखार के कारण भर्ती हो रहे हैं। इन बच्चों की उम्र पांच माह से लेकर दो साल तक है। वार्ड के 20 में से 13 बेड भर गए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्व प्रकाश ने कहा कि मासूमों को धूप में न जाने दें। सूरज ढलने के बाद बाहर निकाले। खान-पान पर ध्यान दें।
30 साल बाद भीषण गर्मी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. शैलेंद्र राय का कहना है कि 30 वर्ष बाद इतना गर्म दिन देखने को मिला है। 30 मई 1994 को प्रयागराज में अधिकतम तापमान 48.4 डिग्री सेल्सियस पड़ा था। जिसके बाद से अब यानि 28 मई को अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस रहा।