मंझनपुर। मेडिकल कॉलेज में तैनात संविदा कर्मचारी पर एक मरीज ने 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए 24 जून को डीएम मधुसूदन हुल्गी को शिकायतपत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। मामले को संज्ञान में लेते डीएम ने दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच करवाई। मामले की जानकारी आरोपी कर्मचारी को हुई तो उसने आनन-फानन में पीड़ित को उसका रुपया वापस कर दिया।
अमीना गोराजू गांव निवासी लल्लू ने 24 जून को डीएम मधुसूदन हुल्गी को शिकायती पत्र देते हुए बताया था कि उसे पथरी है। जिसका इलाज कराने वह चार जून को मेडिकल कॉलेज के मुख्य अस्पताल गया था। वह पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए पहुंचा तो वहीं बगल में एचआईवी/एसटीआई विभाग में वीरेंद्र कुमार गौतम नाम का संविदा कर्मी मिला।
उसने खुद को डॉक्टर बताते हुए समस्या पूछने के बाद कहा कि इसका इलाज यहां संभव नहीं है। इतना सुनते ही पीड़ित ने उनसे सही जगह इलाज कराने की सलाह ली तो आरोपी वीरेंद्र ने कहा कि इसका इलाज नहीं बल्कि ऑपरेशन होगा। उसके लिए 50 हजार रुपये लगेंगे। इसपर पीड़ित ने उसे 50 हजार रुपये दे दिया।
इसके बाद आरोपी वीरेंद्र ने दूसरे दिन उसका ऑपरेशन स्थानीय प्राइवेट न्यू वात्सल्य हॉस्पिटल में करवा दिया था। लेकिन, पथरी नहीं निकली थी। मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित किया और जांच शुरू हो गई। आरोप से बचने के चक्कर में कर्मचारी ने पीड़ित से मिलकर उसका पैसा वापस कर दिया। मामले की जानकारी होने के बाद मेडिकल कॉलेज के अफसरों ने कर्मचारी वीरेंद्र कुमार गौतम के नाम लिखापढ़ी करते हुए संविदा समाप्त कर दी।
मामला संज्ञान आने के बाद जांच करवाई गई। उस दौरान संविदा कर्मी ने स्वयं जाकर पीड़ित को पैसा वापस कर दिया। इस हरकत के लिए उसे कार्यमुक्त किया गया है। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य