फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं दी जा रही कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
लॉकडाउन के दौरान मीलों पैदल चलकर या ट्रकों में भूसे की तरह भरकर घर लौटे प्रवासी अब परिवार की गाड़ी खींचने के लिए वापस महानगरों की ओर लौटने लगे हैं। इन प्रवासियों के लिए तमाम राज्यों ने अपने यहां प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी है। राज्य अपने यहां आने वाले लोगों की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट मांग रहे हैं। नतीजतन एंटीजन किट से जांच कराने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जांच के बाद प्रवासी अपने एमओआईसी (चिकित्सा प्रभारी) से लिखित में खुद के निगेटिव होने की रिपोर्ट मांग रहे हैं।
विज्ञापन

बड़ी संख्या में दोआबा के हुनरमंद पड़ोसी राज्यों में नौकरी करते थे। कोई भवन बनाने का काम करता था तो कोई इलेक्ट्रानिक्स, लांड्री, पान की दुकान सहित तमाम तरह का काम। सबसे ज्यादा लोग दिल्ली, मुंबई, गुजरात, हरियाणा आदि राज्यों में काम करते थे। वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर लॉकडाउन हुआ तो करीब 46 हजार श्रमिक पैदल, निजी वाहन व ट्रकों में भूसे की तरह भरकर वापस लौट आए। सरकार की तरफ से प्रवासियों को रोजगार उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया लेकिन यहां उन्हें सिर्फ मनरेगा के तहत ही काम दिया जा सका। पांच महीने से ज्यादा का वक्त गुजरने के बाद अब जिले के कामगार रोजगार नहीं मिलने पर फिर से अपने कार्यस्थल की तरफ वापस लौटने लगेें हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो मुंबई और अरुणाचल प्रदेश जाने वाले लोगों को राज्य में प्रवेश से पहले कोरोना निगेटिव होने की जांच रिपोर्ट दिखाना पड़ रहा है। इसे लेकर कामगार बेहद परेशान हैं। दरअसल जिले में जो लोग कोरोना की जांच कराते हैं उन्हें पॉजिटिव होने पर ही स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल ले जाकर भर्ती करती है। निगेटिव आए लोगों को कोई रिपोर्ट नहीं दी जा रही है। इस बाबत जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. हिंदमणि का कहना है सभी स्टेटिक बूथ में जांच की सुविधा है। एंटीजन किट से जांच कराने के बाद अगर व्यक्ति निगेटिव है तो वह सम्बंधित एमओआईसी से लिखित में रिपोर्ट ले सकता है। हालांकि, इसकी जानकारी नहीं है कि राज्यों में प्रवेश के पहले कोरोना निगेटिव होने की रिपोर्ट जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें